जान बूझकर बैंकों का पैसा दबाने वाले -विलफुल डिफाल्टरों- पर चाहे सरकार जितनी सख्ती बरतने का संदेश दे लेकिन सच्चाई यही है कि देश के 7000 से भी ज्यादा ग्राहकों ने सरकारी बैंकों का 59000 करोड़ रुपये दबा रखा है।
इस तरह के अधिकतर ग्राहक स्टेट बैंक और सेंट्रल बैंक के हैं। वित्त वर्ष 2014-15 के लिए तैयार किये गए आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2015 तक देशभर में सरकारी बैंकों के 7035 विलफुल डिफाल्टरों ने करीब 59000 करोड़ रुपये की रकम दबा रखी थी।
इनमें स्टेट बैंक और इसके सहयोगी बैंकों के 1628 विलफुल डिफाल्टरों के पास 16834 करोड़ रुपये का बकाया था। यदि ग्राहक संख्या के हिसाब से देखा जाए तो स्टेट बैंक के बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का स्थान है।
इस बैंक के 722 विलफुल डिफाल्टर की सूची में हैं। इसके बाद यूनियन बैंक का स्थान है जिसके 643 विलफुल डिफाल्टर हैं जबकि तीसरा स्थान केनरा बैंक का है जिनके पास 612 विलफुल डिफाल्टर है।