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7035 डिफाल्टरों ने दबा रखे हैं बैंकों के 59000 करोड़

Wed, 21 Oct 2015 08:56 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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जान बूझकर बैंकों का पैसा दबाने वाले -विलफुल डिफाल्टरों- पर चाहे सरकार जितनी सख्ती बरतने का संदेश दे लेकिन सच्चाई यही है कि देश के 7000 से भी ज्यादा ग्राहकों ने सरकारी बैंकों का 59000 करोड़ रुपये दबा रखा है।
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इस तरह के अधिकतर ग्राहक स्टेट बैंक और सेंट्रल बैंक के हैं। वित्त वर्ष 2014-15 के लिए तैयार किये गए आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2015 तक देशभर में सरकारी बैंकों के 7035 विलफुल डिफाल्टरों ने करीब 59000 करोड़ रुपये की रकम दबा रखी थी।

इनमें स्टेट बैंक और इसके सहयोगी बैंकों के 1628 विलफुल डिफाल्टरों के पास 16834 करोड़ रुपये का बकाया था। यदि ग्राहक संख्या के हिसाब से देखा जाए तो स्टेट बैंक के बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का स्थान है।
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इस बैंक के 722 विलफुल डिफाल्टर की सूची में हैं। इसके बाद यूनियन बैंक का स्थान है जिसके 643 विलफुल डिफाल्टर हैं जबकि तीसरा स्थान केनरा बैंक का है जिनके पास 612 विलफुल डिफाल्टर है।
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बैंकों ने शुरू की कार्रवाई

सूची के मुताबिक यदि ज्यादा राशि दबाकर बैठने का आंकड़ा लें तो इसमें स्टेट बैंक के बाद पंजाब नेशनल बैंक का स्थान आता है। इसके 410 विलफुल डिफाल्टरों के पास बैंक का 7282.25 करोड़ रुपये का बकाया है।

इसके बाद सेंट्रल बैंक है जिसका 4428.62 करोड़ रुपये फंसा हुआ है। ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स के 382 विलफुल डिफाल्टरों के पास 3877.44 करोड़ रुपये फंसा हुआ है। यूको बैंक में देखें तो इसमें भी 594 विलफुल डिफाल्टरों के पास 3677.08 करोड़ रुपये एनपीए बना हुआ है।

यूं तो सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंसियल एसेट एंड इंफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी  इंटरेस्ट -सरफेसी- कानून के तहत बैंकों को विलफुल डिफाल्टरों पर भी कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन इन विलफुल डिफाल्टरों पर अभी तक कुछ खास कार्रवाई हो नहीं पाई है।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से जब इस बारे में पूछा गया है उन्होंने बताया कि सरफेसी कानून के तहत बैंको ने कार्रवाई शुरू की है।

उल्लेखनीय है कि सरकारी बैंकों के कुल एनपीए में विलफुल डिफाल्टरों की हिस्सेदारी करीब 22 फीसदी की है। 31 मार्च 2015 को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल एपीए 2.67 लाख करोड़ रुपये था जबकि एक साल पहले यह 2.40 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर था।

हालांकि बैंकों का जानबूझ कर पैसा दबाने वालों, जिन्हें तकनीकी भाषा में विलफुल डिफाल्टर कहा जाता है, पर अंकुश लगाने के लिए देश के बैंकिंग क्षेत्र के नियामक रिजर्व बैंक ने भी नियमों को सख्त किया है।

पर अभी भी ऐसी कंपनियां बैंकों का पैसा लौटाने के लिए आगे नहीं आ रही हैं। कई बार वित्त मंत्रालय के तरफ से भी विलफुल डिफाल्टर को कड़ा संदेश दिया जा चुका है।
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