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1 अप्रैल से अस्तित्व में आएगा देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक, ग्राहकों पर पड़ेगा यह असर

Wed, 02 Jan 2019 06:08 PM IST
kapil sharma बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट में तीन बैंकों के विलय को मंजूरी दे दी गई है। कैबिनेट ने इस साल देश के तीन प्रमुख सरकारी बैंकों--बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय को मंजूरी दे दी है। नए साल में देश के तीन प्रमुख सरकारी बैंक पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। इनकी जगह एक नया बैंक बनेगा, जिससे इनके ग्राहकों पर बड़ा असर पड़ेगा। सरकार ने 2018 में बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक का विलय करने का ऐलान किया था। 

बनेगा देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक

देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय होगा। इस विलय के बाद जो बैंक अस्तित्व में आएगा, वह एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा। हालांकि इन बैंकों के ग्राहकों का पेपरवर्क काफी बढ़ जाएगा। देना और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय नहीं होगा, ब्लकि तीनों बैंकों का विलय करके एक नया बैंक बनाया जाएगा।

फिर से खोलना पड़ सकता है खाता

इन तीन बैंकों के ग्राहकों को नए बैंक में अपना फिर से खाता खोलना होगा। इससे उनका पेपर वर्क काफी बढ़ जाएगा। ग्राहकों को खाता खोलने के लिए एक बार फिर से केवाईसी की प्रक्रिया को दोहराना होगा। केवाईसी हो जाने के बाद ग्राहकों को नई चेकबुक, एटीएम कार्ड और पासबुक मिलेगी। 
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देश में यह हैं पांच बड़े बैंक

बैंक ऑफ बड़ौदा
देश में जो पांच बड़े बैंक हैं, उनमें एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं। इन बैंकों में एसबीआई में फिलहाल सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का विलय हो चुका है। 

जमा राशि रहेगी सुरक्षित

इन तीनों बैंकों के ग्राहकों की जमा राशि पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी। हालांकि विलय होने के बाद जब नया बैंक आस्तित्व में आएगा, तो फिर ग्राहकों को कुछ समय के लिए खाते का परिचालन करना बंद करना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सभी कुछ नए सिरे से होगा और बैंक उतने समय के लिए आपके खाते में से पैसा निकालने या फिर जमा कराने पर रोक लगा सकता है। 

85 हजार कर्मचारियों की संख्या

एकीकरण के बाद यह देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा, जिसका कुल कारोबार 14,82,422 करोड़ रुपये का और उसमें 85,675 कर्मचारी और अधिकारी होंगे। इस समय बैंक ऑफ बड़ौदा में 56,361, विजया बैंक में 15,874, जबकि देना बैंक में 13440 कर्मचारी हैं।

इससे बड़े या मजबूत बैंक की अपेक्षा छोटे या कमजोर बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों को फायदा होगा। उनकी न सिर्फ सेवा शर्तें बेहतर हो जाएंगी, बल्कि वेतन भत्ता भी बेहतर हो जाएगा। निदेशक मंडल की बैठक में तय होगा कि एकीकृत बैंक का नाम क्या होगा।

इसके अलावा, अन्य चीजों पर भी वहीं फैसला होगा। इस बैंक का कुल कारोबार 14,82,422 करोड़ रुपये का होगा जबकि कुल ऋण 6,40,592 करोड़ रुपये का होगा। 
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लोन पर नहीं पड़ेगा असर

बैंकों का विलय होने से आपके लोन और ब्याज दर पर भी कोई खास असर नहीं पड़ेगा। जब कोई बैंक किसी बैंक में मर्ज होता है तो लोन अमाउंट उस बैंक में ट्रांसफर हो जाता है और मौजूदा ब्याज दर ही उस पर अप्लाई होता है।

खुश हैं बैंकों के बड़े अधिकारी

बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी और सीईओ पी एस जयकुमार ने कहा है कि इस फैसले से बैंक को फायदा होगा। बैंक को स्केल बढ़ने का फायदा मिलेगा और ज्यादा प्रोडक्ट ऑफर कर सकेंगे। इससे आगे ग्रोथ के लिए अच्छी उम्मीद है।

वहीं विजया बैंक के सीएमडी शंकर नारायण ने कहा है कि इस विलय के बाद कर्मचारियों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।  तीनों बैंकों में सरकार की 70 फीसदी हिस्सेदारी है। विलय को मंजूरी मिलने में कोई दिक्कत नहीं होगी। सरकार ने पर्याप्त पूंजी देने का भरोसा दिया है। 
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