कर्जधारक की आय कम होती है तो वह बैंक से लोन रीस्ट्रक्चर करने की सिफारिश कर सकते हैं। इसके तहत किस्त चुकाने की अवधि तो बढ़ जाएगी लेकिन मासिक बोझ में कमी आ सकती है। उदाहरण के लिए, अगर मौजूदा कर्ज 20 साल के लिए है और 10 हजार की मासिक किस्त है, तो रीस्ट्रक्चर के जरिये बैंक इस अवधि को 30 साल कर सकते हैं और मासिक किस्त घटकर 6 हजार रुपये हो जाएगी।
अगर ब्याज दर अधिक है और दूसरा बैंक कम ब्याज पर लोन दे सकता है, तो रीफाइनेंसिंग करा सकते हैं। होम लोन जैसी लंबी अवधि के कर्ज पर ब्याज दरों में मामूली अंतर भी लाखों रुपये की बचत करा सकते हैं।
नीलामी की नौबत आए तो खुद बेचें संपत्ति
अगर बैंक से बातचीत विफल होती है और संपत्ति बेचने की नौबत आती है, तो बेहतर होगा कि इसका प्रबंध खुद करें। इससे आप संपत्ति की ज्यादा कीमत हासिल कर सकेंगे। दरअसल, बैंक जल्द वसूली के लिए संपत्ति को औने-पौने दाम में बेच देते हैं।
कर्जदाता खुद खरीदार की तलाश करते हैं तो उन्हें अपनी संपत्ति का वाजिब दाम मिलने की ज्यादा उम्मीद रहती है। साथ ही प्रॉपर्टी की खूबियों को भी वे खरीदार के सामने बेहतर तरीके से बयां कर सकेंगे।