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कोरोना संकट : होम लोन ईएमआई भुगतान में हुई चूक तो बचाव के हैं ये तीन रास्ते

Sat, 04 Apr 2020 06:58 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते संक्रमण और देशभर में जारी लॉकडाउन के बीच कंपनियों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। ऐसे में नौकरीपेशा लोगों की आमदनी पर भी संकट आ सकता है, जिसका असर होम लोन की किस्त चुकाने पर पड़ेगा। इन मुश्किलों के बीच अगर ईएमआई भुगतान में चूक होती है, तो आप तीन विकल्पों के इस्तेमाल से इसका हल निकाल सकते हैं।

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आरबीआई नियमों के तहत अगर होम लोन की किस्त 90 दिनों तक नहीं चुकाई जाती है, तो बैंक आपके पूरे कर्ज को एनपीए में डाल देंगे और आपको डिफॉल्टर घोषित कर दिया जाता है। इसके अलावा सरफेसी कानून के तहत कर्जदाता बैंक या वित्तीय संस्थान को यह अधिकार होता है कि वह संपत्ति को जब्त कर, नीलामी के जरिये अपने कर्ज की भरपाई करे। आपका संकट यहीं खत्म नहीं होगा, अगर बिक्री के बाद मिली रकम बकाया कर्ज से कम होगी तो शेष राशि का भुगतान भी करना पड़ेगा।



साथ ही कर्जधारक को पूंजीगत लाभ कर भी चुकाना पड़ेगा। इतना ही नहीं अगर मकान 5 साल की अवधि के भीतर बेचा जाता है, तो आपको आयकर की धारा 80सी के तहत पूर्व में लिए गए लाभ भी लौटाने होंगे।

 ईएमआई होल्ड या एरियर भुगतान

होम लोन की पहली किस्त बाउंस होने पर तत्काल बैंक प्रबंधक से बातचीत करें और उन्हें अपनी दिक्कतों के बारे में बताएं। बैंक का मकसद सिर्फ कर्ज वसूली करना होता है, लिहाजा वह संपत्ति जब्त करने से पहले सभी विकल्पों पर बात करना चाहता है।

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ऐसे में आप बैंक से ईएमआई को कुछ महीने होल्ड पर डालने की अपील कर सकते हैं, जिससे आपको मोहलत मिल जाएगी। इसके अलावा किस्त की रकम चुकाने के लिए एडवांस भुगतान के बजाए एरियर भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं। एडवांस भुगतान महीने की शुरुआत में किया जाता है और एरियर भुगतान महीने के आखिर में।

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कर्जधारक की आय कम होती है तो वह बैंक से लोन रीस्ट्रक्चर करने की सिफारिश कर सकते हैं। इसके तहत किस्त चुकाने की अवधि तो बढ़ जाएगी लेकिन मासिक बोझ में कमी आ सकती है। उदाहरण के लिए, अगर मौजूदा कर्ज 20 साल के लिए है और 10 हजार की मासिक किस्त है, तो रीस्ट्रक्चर के जरिये बैंक इस अवधि को 30 साल कर सकते हैं और मासिक किस्त घटकर 6 हजार रुपये हो जाएगी।

अगर ब्याज दर अधिक है और दूसरा बैंक कम ब्याज पर लोन दे सकता है, तो रीफाइनेंसिंग करा सकते हैं। होम लोन जैसी लंबी अवधि के कर्ज पर ब्याज दरों में मामूली अंतर भी लाखों रुपये की बचत करा सकते हैं।

 नीलामी की नौबत आए तो खुद बेचें संपत्ति

अगर बैंक से बातचीत विफल होती है और संपत्ति बेचने की नौबत आती है, तो बेहतर होगा कि इसका प्रबंध खुद करें। इससे आप संपत्ति की ज्यादा कीमत हासिल कर सकेंगे। दरअसल, बैंक जल्द वसूली के लिए संपत्ति को औने-पौने दाम में बेच देते हैं।

कर्जदाता खुद खरीदार की तलाश करते हैं तो उन्हें अपनी संपत्ति का वाजिब दाम मिलने की ज्यादा उम्मीद रहती है। साथ ही प्रॉपर्टी की खूबियों को भी वे खरीदार के सामने बेहतर तरीके से बयां कर सकेंगे।

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