आरबीआई ने बुधवार को अपनी मौद्रिक समीक्षा नीति में ब्याज दरों में कोई बदलाव न करके फाइनेंशियल मार्केट्स को चौंका दिया। आरबीआई का यह ऐलान उस पूर्वनुमान के उलट है जिसमें कहा जा रहा था कि नीतिगत दरों में 25 बेसिस की कटौती की जा सकती है। अनुमान लगाया जा रहा था कि आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा नीति में कटौती की घोषणा कर सकते हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक कटौती न करने के निर्णय को लेकर दलाल स्ट्रीट के विश्लेषकों ने तीन कारण बताए हैं जिनकी वजह से ब्याज दरों में कटौती नहीं की गई।
मुद्रास्फीति: रिजर्व बैंक ने इस बात पर गौर किया कि गेहूं, चना और चीनी जैसी खाने वाली चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं। साथ ही ओपेक ब्लॉक ने भी जनवरी से कच्चे तेल का उत्पादन कम करने का निर्णय लिया है। इस वक्त अगर आरबीआई दरों में कटौती करता तो इससे महंगाई बढ़ सकती थी।