भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अचानक हुए एक घटनाक्रम में रेपो दर से जुड़ी उधारी दर (आरएलएलआर) वाले अपने होम लोन उत्पाद को वापस ले लिया है। इसका एलान एक जुलाई 2019 को किया गया था और यह एक सितंबर से लागू होना था। दिलचस्प है कि एसबीआई ऐसा पहला बैंक था, जिसने रेपो दर से जुड़े होम लोन की पेशकश की थी।
उसके बाद कई बैंकों ने ऐसी योजना का एलान किया था। एसबीआई ने ट्वीट के माध्यम से एक यूजर को दिए जवाब में कहा कि आरएलएलआर आधारिमत होम लोन योजना को वापस ले लिया गया है। इसके बजाय एमसीएलआर आधारित होम लोन योजना बनी रहेगी। रेपो से जुड़ी ब्याज दर आधारित होम लोन योजना तुलनात्मक रूप से नया उत्पाद है।
एक सितंबर 2019 से प्रभावी एसबीआई की रेपो से जुड़ी उधारी दर (आरएलएलआर) 7.65 फीसदी तय की गई थी। हालांकि इस पर आधारित होम लोन कर्ज की मात्रा पर निर्भर होने की बात कही गई थी।एमसीएलआर बैंक का आंतरिक बेंचमार्क है और देखने में आया है कि यह ग्राहकों को रेपो दर में कमी का फायदा पहुंचाने में नाकाम रहा है।
इसलिए आरबीआई ने एलान किया था कि बैंकों द्वारा एक अक्टूबर से सभी नए परिवर्तनीय (फ्लोटिंग) दर वाले पर्सनल, खुदरा व एमएसएमई कर्ज बाह्य बेंचमार्क से जोड़ दिए जाएंगे। हालांकि, बैंक अपना बेंचमार्क तय करने को स्वतंत्र होंगे। इनमें आरबीआई की नीतिगत दर, सरकार की फाइनेंशियल बेंचमार्क ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित भारत सरकार की तीन महीने की ट्रेजरी बिल प्राप्ति, छह महीने की प्राप्ति या एफबीआईएल द्वारा प्रकाशित अन्य बेंचमार्क ब्याज दर कोई भी हो सकती है।