भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि 31 अगस्त को ऋण के किस्त के भुगतान पर रोक की अवधि समाप्त होने के कारण बैंकों के लिए पूंजी का संरक्षण और पुनर्पूंजीकरण महत्वपूर्ण होगा। एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पुनर्पूंजीकरण या पूंजी संरक्षण का विकल्प देने की जरूरत है क्योंकि दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के प्रावधानों को एक साल तक निलंबित रखने के चलते दबाव वाले खातों का समाधान प्रभावित होगा।
ये है नियम
एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट 'इकोरैप' में कहा कि, 'समस्या यह है कि आईबीसी को एक साल के लिए निलंबित रखने से इस दौरान समाधान नहीं हो सकता है, और ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में या तो पूंजी डाली जाए या उन्हें पूंजी संरक्षण का विकल्प दिया जाए, क्योंकि यह साफ नहीं है कि पुनर्पूंजीकरण के लिए सरकार के पास कितनी राजकोषीय गुंजाइश है।'
आरबीआई गवर्नर ने कही थी ये बात
इस महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों को कोरोना वायरस के प्रकोप से पैदा होने वाले जोखिमों को कम करने के लिए पर्याप्त पूंजी बफर बनाने के लिए अग्रिम आधार पर पूंजी जुटाने की जरूरत है। रिपोर्ट में बासेल नियमों में राहत देने की बात भी कही गई, जिससे बैंकों को करीब एक लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी मिल सकती है।