इरडा ने कहा है कि कोविड-19 संक्रमण की चपेट में आए बीमाधारक का कैशलेस इलाज करने से अस्पताल इनकार नहीं कर सकते हैं। नियामक ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि अस्पतालों में ग्राहकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा में आ रही परेशानियों पर नजर रखें।
भारतीय बीमा नियामक प्राधिकरण (इरडा) ने पिछले सप्ताह जारी सर्कुलर में कहा है कि कई बीमाधारकों ने कोरोना के कैशलेस इलाज नहीं होने की शिकायत की थी। कंपनियों के नेटवर्क में शामिल अस्पताल भी मरीजों का कैशलेस इलाज करने से कतरा रहे हैं।
इरडा ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि उनके नेटवर्क में शामिल अस्पतालों के साथ तालमेल बैठाएं और सर्विस लेवल एग्रीमेंट (एसएलए) में शामिल नियमों के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा सुनिश्चित कराएं। कंपनियों को कोविड-19 से जुड़ी ग्राहक की समस्याओं के निदान के लिए पुख्ता तंत्र विकसित करना होगा। उन्हें चैनल में शामिल अस्पतालों के साथ लगातार संपर्क के साथ बीमाधारक का फीडबैक भी लेना पड़ेगा।
शिकायत पर कंपनियां उठाएंगी कदम
बीमा नियामक के अनुसार, अगर कोई अस्पताल कैशलेस इलाज की सुविधा देने से इनकार करता है तो बीमाधारक को तत्काल संबंधित राज्य या क्षेत्र की सरकारी एजेंसियों से शिकायत करनी चाहिए। ग्राहक संबंधित बीमा कंपनी की वेबसाइट पर या ईमेल के जरिये भी शिकायत भेज सकते हैं।
मामले का विश्लेषण कर बीमा कंपनियां दोषी अस्पताल या नेटवर्क प्रोवाइडर के खिलाफ कार्रवाई अथवा जुर्माने पर फैसला करेंगी। इसकी जानकारी कंपनी अपने वेबसाइट या पोर्टल पर भी सार्वजनिक करेगी और बीमाधारक को भी इसकी सूचना देनी होगी।
चैनल में शामिल हर अस्पताल देंगे सुविधा
इरडा ने स्पष्ट किया है कि बीमा पॉलिसी के एसएलए में शामिल नियमों के तहत संबंधित कंपनी या टीपीए के चैनल में जितने भी नेटवर्क प्रोवाइडर (अस्पताल) आएंगे, उन सभी को कैशलेस सुविधा का लाभ देना पड़ेगा। यह जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर होगी कि वह संबंधित अस्पताल पर अपने ग्राहकों को पर्याप्त सुविधा देने का दबाव बनाए और लगातार संपर्क के जरिये ग्राहकों को अपडेट करे।