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आरबीआई ने अदालत को बताया: PMC बैंक के अधिग्रहण के लिए लघु वित्त बैंक स्थापित करने की दी गई मंजूरी

Mon, 12 Jul 2021 04:38 PM IST
‌डिंपल अलावाधी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

आरबीआई ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि उसने पीएमसी के जल्द अधिग्रहण के लिए एक लघु वित्त बैंक स्थापित किए जाने को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी।
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पीएमसी बैंक - फोटो : PTI
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विस्तार
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि उसने घोटाले से प्रभावित पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक यानी पीएमसी बैंक (पीएमसी) के जल्द अधिग्रहण के लिए एक लघु वित्त बैंक स्थापित किए जाने को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। न्यायमूर्ति डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने इस मामले में हलफनामा दायर करने के लिये आरबीआई को समय देते हुए मामले में सुनवाई की अगली तारीख 20 अगस्त तय की है।

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सेंट्रम फाइनेंस सर्विसेज लिमिटेड को दी गई मंजूरी
आरबीआई की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत भूषण ने अदालत को बताया कि आरबीआई ने सेंट्रम फाइनेंस सर्विसेज लिमिटेड को सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दी है कि वह एक लघु वित्त बैंक स्थापित करेगा जो बहुत जल्द पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक का अधिग्रहण करेगा क्योंकि यह प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है।

कम होगी ग्राहकों को हो रही परेशानी 
उन्होंने कहा कि इससे बैंक के ग्राहकों को हो रही परेशानी कम होगी जो फिलहाल अपना रुपया नहीं निकाल पा रहे थे। अदालत उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता बेजॉन कुमार मिश्रा की के एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। इसमें आरबीआई को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था वह पीएमसी बैंक के जमाकर्ताओं की अन्य जरूरतों जैसे शिक्षा, विवाह और गंभीर आर्थिक हालात पर भी विचार करे न कि सिर्फ गंभीर बीमारी के हालात को देखा जैसा फिलहाल किया जा रहा है।
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इस आवेदन को मिश्रा की मुख्य जनहित याचिका के साथ संलग्न किया गया है जिसमें आरबीआई से पीएमसी बैंक से कोरोना वायरस महामारी के दौरान निकासी पर रोक से राहत देने का निर्देश दिए जाने की मांग की गई है।

सितंबर 2019 में बैंक को नियामकीय अंकुशों के तहत डाला गया
सितंबर, 2019 में रिजर्व बैंक ने पीएमसी बैंक के निदेशक मंडल को भंग करते हुए उसे नियामकीय अंकुशों के तहत डाल दिया था। इसके साथ ही बैंक के जमाकर्ताओं द्वारा निकासी सीमा को भी सीमित कर दिया गया था। बैंक पर ये अंकुश रियल एस्टेट कंपनी एचडीआईएल को दिए गए ऋण के बारे में सही जानकारी नहीं देने और अन्य गड़बड़ियों का पता लगाने के बाद लगाए गए थे। 

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