सरकार के साथ बड़े विवाद का कारण रहे आरबीआई के पूंजी मसले को सुलझाने के लिए पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अगुवाई में छह सदस्यीय पैनल गठित किया गया है। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को बताया कि आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव राकेश मोहन इस इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क समिति के उपाध्यक्ष होंगे।
करीब एक माह पहले आरबीआई की बोर्ड बैठक में मसले को सुलझाने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाने का फैसला किया गया था। यह समिति रिजर्व बैंक की आरक्षित पूंजी का आकार तय करने पर मंथन करेगी।
आरबीआई की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पूर्व गवर्नर बिमल जालान इस समिति की अगुवाई करेंगे जबकि आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग, आरबीआई के डिप्युटी गवर्नर एनएस विश्वनाथन भी पैनल में शामिल होंगे। इसके अलावा केंद्रीय बैंक के दो निदेशक भारत दोषी और सुधीर मांकड़ भी समिति के सदस्यों में शामिल रहेंगे।
समिति अपनी पहली बैठक के बाद 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि आरबीआई के लाभांश में से कितनी पूंजी सरकार को दी जा सकती है और कितनी पूंजी आरबीआई के पास सुरक्षित रहेगी।
इसके अलावा समिति आरबीआई के जोखिम प्रावधानों और बैलेंस शीट पर भी अपनी सलाह देगी। साथ ही आरबीआई के सरप्लस बफर और घाटे का स्तर तय करने में भी यह समिति बड़ी भूमिका निभाएगी।