रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आज दोपहर बाद अगले दो महीनों के लिए अपनी मौद्रिक नीति का ऐलान करेगा। इस नीति के ऐलान से ही अगले साल जनवरी तक आपकी ईएमआई पर कितना असर पड़ेगा या नहीं इसके बारे में पता चलेगा।
विश्व बैंक, मूडीज द्वारा रैकिंग और रेटिंग बढ़ाने के बाद आरबीआई क्या रेपो रेट में और कमी करेगा, इस बारे में पता चलेगा। हालांकि जानकारों का कहना है कि इस बार आरबीआई रेपो रेट में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं करेगा।
मंगलवार को शुरू हुई थी मीटिंग
आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक मंगलवार को शुरू हो गई थी। जीडीपी ग्रोथ, महंगाई, निजी क्षेत्र के निवेश, क्रूड की कीमतों और निर्यात में कमजोरी जैसे अहम फैक्टर पर विचार करेगी। हालांकि जानकारों के मुताबिक रेट में शायद ही कटौती की जाए।
महंगाई दर बनेगा बड़ा कारण
महंगाई दर के उच्चतम शिखर पर रहने के कारण आरबीआई इस बार रेपो रेट की दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं करेगा। आरबीआई की एमपीसी दोपहर 2.30 बजे अपने फैसले को मुंबई में सुनाएगा।
एचडीएफसी बैंक के चीफ इकोनॉमिक एक्सपर्ट अभीक बरूआ ने amarujala.com से बात करते हुए कहा कि आरबीआई के पास इस वक्त कई तरह के ऑप्शन हैं, लेकिन दरें बढ़ेंगी या घटेंगी इस पर आने वाला वक्त तय करेगा। हो सकता है कि रेट कट का फायदा बैंक अभी न देकर के फरवरी में दे। यह बहुत कुछ बुधवार की बैठक में तय होगा।
जीडीपी में हुआ इजाफा
जुलाई सितंबर के जीडीपी आंकड़ों ने 6.3 फीसदी का आंकड़ा पार किया, जो कि पिछले 5 तिमाही का सबसे ज्यादा है। जीएसटी लागू होने के बाद आए इन आंकड़ों के मुताबिक कोर सेक्टर में 4.7 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली हैं। पिछली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5.7 फीसदी रही थी।
दूसरी तिमाही में भी जीएसटी का असर दिखना संभव है। हालांकि तिमाही आधार पर जीडीपी में रिकवरी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर सरकार का मानना है कि नवंबर-दिसंबर में जीएसटी कलेक्शन में कमी संभव है। ज्यादा रिफंड और रेट घटने से जीएसटी कलेक्शन में कमी आ सकती है।