भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पीएमसी बैंक पर धन निकासी करने के लिए छह माह तक एक हजार रुपये की बंदिश लगाने के बाद लाखों ग्राहक बैंक की शाखाओं पर जाकर पूछताछ कर रहे हैं। हालांकि आरबीआई के अधिकारियों द्वारा चलाई जाने वाली एक क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी का भी इस बैंक में खाता है। इस खाते में 105 करोड़ रुपये का फिक्सड डिपॉजिट है।
आरबीआई के अधिकारियों ने जमा किया है पैसा
द हिंदू अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई के अधिकारियों और कर्मचारियों की एक क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी है। इस सोसाइटी का खाता पीएमसी बैंक है। यह बैंक में एक तरह से सबसे बड़ा एफडी खाता है। अब आरबीआई द्वारा बैंक में मौजूद खातों के परिचालन पर रोक लगने के कारण अधिकारियों व कर्मचारियों का पैसा भी फंस गया है। हालांकि बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस ने कहा है कि बैंक में सभी का पैसा सुरक्षित है।
एचडीआईएल देता था 50 फीसदी कारोबार
बैंक में एचडीआईएल सबसे पुराना ग्राहक था। थॉमस के अनुसार केवल एचडीआईएल ही बैंक के कुल टर्नओवर का 50 फीसदी बिजनेस देता है। 1988 में जब बैंक में कोई पैसा जमा नहीं कर रहा था, तब इस कंपनी ने 13 लाख रुपये जमा किए थे।
ग्राहकों का साढ़े 11 हजार करोड़ रुपये जमा
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो बैंक के पास ग्राहकों का साढ़े 11 हजार करोड़ रुपये जमा हैं। इसलिए ग्राहक बेहद परेशान हैं। बता दें कि इसकी ब्रांच पंजाब, महाराष्ट्र, दिल्ली और गोवा में स्थित है।
इसलिए लगाया प्रतिबंध
अनियमितता बरतने के आरोप में भारतीय रिजर्व बैंक ने मुंबई स्थित पंजाब एंड महाराष्ट्र सहकारी बैंक पर छह महीने का प्रतिबंध लगाया है। आरबीआई ने कार्रवाई बैंकिग रेलुगेशन एक्ट, 1949 के सेक्शन 35ए के तहत की है। प्रतिबंध सेक्शन 35 A के तहत लगाया गया है।
लोन देने पर भी रोक
आरबीआई ने अपने ऑर्डर में कहा है कि खाताधारक अपने बचत खाते, करेंट खाता या अन्य किसी भी खाते से छह महीने में 1,000 रुपये से अधिक पैसे नहीं निकाल पाएंगे। इतना ही नहीं, पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक ग्राहकों को किसी भी तरह का लोन भी नहीं दे सकता है। आरबीआई का कहना है कि मुंबई स्थित पीएमसी बैंक को बैंकिंग से संबंधित लेनदेन करने से पहले उससे लिखित में मंजूरी लेनी होगी।