भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा कमेटी का फैसला थोड़ी देर में आएगा। इस बैठक में आरबीआई ब्याज दरें को कम रखने या फिर बढ़ाने पर फैसला लेता है। लेकिन इस बार होनी बैठक में ब्याज दर नहीं ब्लकि आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता पर दिए जाने वाले बयान पर टिकी है।
ब्याज दरों में नहीं होगा बदलाव
हालांकि रिजर्व बैंक ब्याज दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं करेगा, ऐसा आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है। फिलहाल रेपो रेट 6.5 फीसदी है। महंगाई दर में कमी होने के चलते यह फैसला लिया जा सकता है।
सरकार से जारी है तनातनी
20 नवंबर को हुई आरबीआई बोर्ड की 9 घंटे की मैराथन बैठक के बाद भी अभी स्वायत्ता को लेकर मामला सुलझा नहीं है। केंद्र के साथ टकराव की खबरों के बीच नौ घंटे तक चली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बोर्ड की बैठक में वित्तीय क्षेत्र के लिए नकदी बढ़ाने और छोटे उद्योगों को ज्यादा कर्ज देने पर सहमति बनी।
बैठक के बाद आरबीआई ने कहा कि केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल ने आरबीआई को 25 करोड़ रुपये की कुल कर्ज सुविधा के साथ छोटे व मझोले उद्योगों की संकटग्रस्त परिसंपत्तियों का पुनर्गठन करने की योजना पर विचार करने को कहा है।
बैठक के दौरान बोर्ड ने नकद आरक्षी अनुपात यानी सीआरएआर को 9 फीसदी रखने का फैसला लिया। हालांकि, कैपिटल कंजर्वेशन बफर के तहत 0.625 फीसदी के आखिरी चरण को लागू करने के लिए ट्रांजिशन पीरियड को एक साल बढ़ाने पर सहमति बन गई। यह अवधि 31 मार्च, 2019 तक होगी।
बोर्ड की अगली बैठक 14 दिसंबर को होगी। लोकसभा चुनाव, 2019 को देखते हुए सरकार छोटे व मझोले उद्योगों को राहत देने के लिए आरबीआई से कर्ज बढ़ाने और उन्हें राहत देने की मांग कर रही थी। हालांकि, केंद्रीय बैंक अपने सख्त नियमों में ढील देने को तैयार नहीं था। इस मुद्दे पर भी सरकार और आरबीआई के बीच मतभेद उभरकर सामने आए थे।