महंगाई बढ़ने से पहले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जून में होने वाली द्वैमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य नीतिगत दर यानी रेपो रेट में एक बार फिर से कम से कम 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है। आईएचएस मार्किट ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि उसके बाद महंगाई बढ़ने और राजकोषीय घाटे की आशंका से वित्त वर्ष 2019-20 के बचे हुए महीनों में रेपो रेट में कटौती की संभावना कम होगी।
केंद्रीय बैंक ने आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने के लिए इस साल फरवरी और अप्रैल में रेपो रेट में 25-25 आधार अंकों (0.25 फीसदी) की कटौती की थी। वर्तमान में यह दर 6 फीसदी है। वैश्विक मौद्रिक नीति कार्रवाई और उसके आर्थिक प्रभाव के बारे में लंदन की आईएचएस मार्किट ने कहा कि घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में नरमी दिख रही है।
साथ ही भारत में मुद्रास्फीती की दर आरबीआई के महंगाई लक्ष्य से नीचे रह सकता है। ऐसे में संभावना है कि आरबीआई जून में नीतिगत दर में कटौती कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जून के बाद महंगाई दबाव और राजकोषीय घाटा बढ़ने की आशंका को देखते हुए नीतिगत दर में और कटौती होने की गुंजाइश सीमित होगी। वहीं, वर्ष 2000 की शुरुआत से मध्य के बीच मौद्रिक नीति को सख्त किया जा सकता है।
ईंधन की कीमतों में तेजी की आशंका
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 की पहली तिमाही में मौद्रिक नीति में नरमी के साथ कर्ज नियमों में ढील देने और चुनावी खर्च बढ़ने से 2019-20 की पहली छमाही में वृद्धि को कुछ गति मिलेगी। आने वाले महीनों में और खासकर मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के अनुमान के मद्देनजर खाद्य पदार्थ और ईंधन की कीमतों में तेजी आने की आशंका है। इससे हेडलाइन महंगाई दर (सकल महंगाई दर) 5 फीसदी के स्तर को पार कर सकती है। 2019 में महंगाई दर औसतन 4.2 फीसदी और 2020 में 5.3 फीसदी रहने का अनुमान है।