छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी 10 रुपये का सिक्का नहीं चलता है। इसके अलावा कोरबा, चांपा जिले में भी ऐसा ही देखा गया। वहां चाहे बस हो, रेहड़ी के दुकानदार हो या बड़े मॉल हो, कहीं भी 10 रुपये का सिक्का स्वीकार नहीं किया जा रहा है। लेकिन उसी शहर में पांच रुपये और दो रुपये के सिक्के आराम से स्वीकार किए जा रहे हैं।
नोटबंदी के बाद पैदा हुई थी यह स्थिति
बैंक के अधिकारी बताते हैं कि साल 2016 के नवंबर में जब नोटबंदी हुई थी तब बाजार में बड़े पैमाने पर सिक्के उतारे गए थे। उन सिक्कों को जब वापस बैंकों में जमा किया जाने लगा तो बैंक कर्मचारी उसे लेने में आनाकानी करते थे।
उस दौरान बैंक कर्मियों का कहना था कि नोटों को तो मशीन से गिन लिया जाएगा, लेकिन हजारों हजार सिक्कों को कौन गिनेगा। वैसे भी बैंक में कर्मचारियों की किल्लत है, ऐसे में एक ग्राहक का सिक्का गिनने में एक घंटा लगेगा, तो काउंटर पर ग्राहकों की लंबी लाइन लग जाएगी।
सभी सिक्के हैं वैध
रिजर्व बैंक के प्रवक्ता का कहना है कि जो भी सिक्के जारी किए गए हैं, वह रिजर्व बैंक के नियम के तहत जारी किए गए हैं। इसलिए सभी सिक्के वैध हैं। यदि कोई व्यक्ति या बैंक इसे लेने से इनकार करता है तो उसकी सूचना पुलिस को दी जानी चाहिए, ऐसा करना अपराध है।