की लापरवाही पर, नए सवाल खड़े कर दिए हैं। कैसे कुछ भ्रष्ट लोग सिस्टम को खोखला करने में लगे हुए हैं, यह घोटाला उसी का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
देश के कुछ शातिर धनकुबेर करोड़ों रुपये की चपत लगाकर देश से फरार हो जा रहे हैं और हम यहां गुड गवर्नेंस की बात कर रहे हैं। हजारों करोड़ के फर्जीवाड़े का यह कोई पहला मामला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में उद्योगपति विजय माल्या का मामला अभी निपटा भी नहीं था कि करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का यह नया मामला सबके सामने आ गया, जो बेहद चौंकाने वाला है।
बैंकिंग सेक्टर में मचा हड़कंप
जब से यह मामला सामने आया है, तब से बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मचा हुआ है। भले ही ईडी फौरी कार्रवाई करते हुए इस घोटाले के मास्टर माइंड नीरव मोदी और उनके रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापेमारी करके उनकी संपत्ति को जब्त कर रही हो, लेकिन देश को जो नुकसान होना था, वह तो हो चुका है और साथ में बदनामी हो रही है, वह अलग। पूरे शेयर बाजार में सनसनी फैली हुई है।
सात सालों में किसी को नहीं हुई खबर
सात सालों से पीएनबी के मुंबई की एक शाखा से जालसाजी के जरिए अनाधिकृत ट्रांजेक्शन हो रहा था और इन ट्रांजेक्शन से कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्डर को फायदा पहुंचाया जा रहा था, लेकिन इसकी खबर किसी को नहीं थी, इस पर विश्वास नहीं होता।
इसकी खबर कुछ लोगों को जरूर थी, मगर उच्चे पदों पर बैठे कुछ लोग नियम और कानून को ताक पर रखकर देश के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। ये वही बैंक हैं, जो आम ग्राहकों को छोटा-मोटा कर्ज देने के लिए भी दर्जनों चक्कर कटवाते हैं। उनसे गारंटी वगैरह मांगते हैं, फिर भी लोन मिलने की कोई गारंटी नहीं होती।
यह कैसे हो सकता है कि विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे प्रभावशाली लोगों को हजारों-करोड़ रुपये कर्ज देने के लिए फर्जी गारंटी दे दी जाए और इसकी जानकारी बैंक प्रबंधन, प्रवर्तन निदेशालय, वित्त मंत्रालय आदि को न हो!