देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में शुमार पंजाब नेशनल बैंक को पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 4750 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। हालांकि इस दौरान उसके एनपीए में भी काफी सुधार देखने को मिला है।
2018 में हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी द्वारा किए गए 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले से बैंक को उबरने में अभी थोड़ा समय लगेगा। वहीं बैंक की प्रोविजनिंग 7611 करोड़ रुपये रही।
ग्रॉस, नेट एनपीए में दिखा सुधार
तिमाही आधार पर पीएनबी का ग्रॉस एनपीए में सुधार हुआ है जो पिछली तिमाही के 16.33 फीसदी के मुकाबले चौथी तिमाही में 15.5 फीसदी रहा। जबकि नेट एनपीए भी सुधरकर पिछली तिमाही के 8.22 फीसदी के मुकाबले 6.56 फीसदी रहा।
बैंक ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तिमाही के दौरान उसकी सकल गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) घटकर 15.50 फीसदी पर आ गईं, जो मार्च, 2018 में 18.38 फीसदी थीं। इसी तरह बैंक का शुद्ध एनपीए 11.24 फीसदी से घटकर 6.56 फीसदी रह गया।
नियामक को दी गई सूचना में पीएनबी ने कहा कि बैंक ने मार्च 2018-19 के दौरान कुल आय 14,725.13 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल समान अवधि में पीएनबी की कुल आय 12,945.68 करोड़ रुपये रही थी।
इसी तरह, वित्त वर्ष 20181-19 के बैंक का कुल घाटा 9,570.11 करोड़ रुपये दर्ज किया गया जो पिछले वित्त वर्ष यानी 2017-18 की समान अवधि में यह घाटा 12,113.36 रुपये रहा था। पीएनबी ने कहा कि उसने 2018-19 की मार्च तिमाही के दौरान तरजीही आधार पर 80 करोड़ इक्विटी शेयर जारी किए जिस पर सरकार से 5,908 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश मिला।
पीएनबी का प्रोविजन कवरेज रेश्यो पिछली तिमाही के 68.9 फीसदी से बढ़कर 74.5 फीसदी रहा। वहीं घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन पिछली तिमाही के 2.64 फीसदी के मुकाबले 2.45 फीसदी रहा।