लॉकडाउन के दौरान लोग जमकर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। एसबीआई क्रेडिट कार्ड रखने वाले लोगों ने मई में प्रतिदिन औसतन 175 करोड़ से अधिक खर्च किए।
एसबीआई कार्ड ने मंगलवार को एक बयान में कहा, क्रेडिट कार्ड ऐसा उत्पाद है जो ग्राहकों को आकर्षित करता है। यही कारण है कि लॉकडाउन के दौरान भी क्रेडिट कार्ड के जरिए खर्च निरंतर बना रहा। लॉकडाउन में आंशिक छूट के बाद मई में प्रतिदिन औसत खर्च 175 करोड़ रुपये से अधिक रहा। वहीं 2019-20 के समान महीने में यह 290 करोड़ रुपये से अधिक था। हालांकि, मई के आखिरी 7 दिनों में दैनिक खर्च का स्तर 200 करोड़ रुपये से ज्यादा था। कॉर्पोरेट कार्ड के जरिए 2019-20 की चौथी तिमाही में करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च हुए।
किराना दुकानें, ईंधन, स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च
एसबीआई कार्ड के अनुसार, वह लोग उनके पहले दैनिक औसत खर्च का करीब 60% हासिल कर चुकी है। 2019 की आखिरी तिमाही में ऑनलाइन खर्च कुल खुदरा व्यय का 44 फीसदी था। जो मई में 55 फ़ीसदी हो गया। इसके अलावा जिन मदों में खर्च किए गए हैं। उनमें बड़ी किराना की दुकान जन उपयोगी सेवाएं, ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। यात्रा, बाहर खाने पीने और होटल में ठहरने पर लोगों ने बहुत कम खर्च किए।
वित्तीय जरूरतों के लिए पर्सनल लोन लेना चाहते हैं 82 फीसदी भारतीय
लॉकडाउन लागू होने के बाद करीब 82 फीसदी भारतीयों की वित्तीय स्थिति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इनमें अधिकांश ने अपनी नकदी की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्सनल लोन चुनने का विकल्प तैयार रखा है। इंडियालेंडस की ओर से 5,000 लोगों पर कराए गए सर्वे में शामिल 82 फीसदी लोगों ने कहा है कि कोरोना महामारी ने वेतन भोगी और पेशेवर व्यक्तियों की वित्तीय स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है। वह मौजूदा संकट से निपटने के लिए लोन लेने में पीछे नहीं हटेंगे। वहीं 72 फीसदी का कहना है कि वे कर्ज चुकाने, आवश्यक चिकित्सा शिक्षा शुल्क, घर की मरम्मत और नवीकरण जैसे उच्च प्राथमिकता वाले खर्चों को पूरा करने के लिए तत्काल या भविष्य में पर्सनल लोन का विकल्प चुन सकते हैं।