नए गवर्नर उर्जित पटेल के कार्यकाल में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से बैंकों के बैलेंस शीट दुरुस्त करने और महंगाई नियंत्रित करने के लिए शुरू की गई नीतिगत बदलाव की प्रक्रिया को संस्थागत रूप देने की उम्मीद है। यह बात वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने शुक्रवार को कही। एजेंसी ने साथ ही कहा कि महंगाई दर कम रहने से देश का निवेश माहौल बेहतर होगा और इससे भारत की क्रेडिट रेटिंग पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि मौद्रिक नीति प्रारूप समझौते के तहत महंगाई के लक्ष्य का दायरा काफी बड़ा है। भारत जैसी एक उभरती अर्थव्यवस्था के लिए दो फीसदी महंगाई दर काफी कम और छह फीसदी दर काफी अधिक प्रतीत होती है। फिच के एशिया-पैसेफिक सॉवरेन ग्रुप निदेशक थोमस रूकमाकर ने एक बयान में आगे कहा कि मंहगाई दर चार फीसदी के आगे पीछे रखना तर्कसंगत प्रतीत होता है, क्योंकि खाद्य उत्पादों और तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों का थोक महंगाई दर पर व्यापक असर होता है। उन्होंने कहा कि संरचनागत तौर पर कम महंगाई दर से रेटिंग प्रोफाइल पर सकारात्मक असर होगा, क्योंकि इससे निवेश माहौल सुधरेगा, जो टिकाऊ विकास में योगदान करेगा।
अगले सप्ताह चार सितंबर को वर्तमान गवर्नर रघुराम राजन का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पटेल गवर्नर पद संभालने जा रहे हैं। रूकमाकर ने कहा कि पटेल चूंकि पिछले तीन साल से आरबीआई के डिप्टी गवर्नर हैं। इसलिए उम्मीद है कि उनके गवर्नर बनने के बाद आने वाले वर्षों में भी आरबीआई की नीति वर्तमान दिशा में ही आगे बढ़ेगी।