केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर कांग्रेस के रवैये की तीव्र आलोचना करते हुए कहा है कि इस पर बहुत हो गया। अब कांग्रेस के साथ या कांग्रेस के बिना, इसे पारित कराया जाएगा। एक साक्षात्कार में अरुण जेटली ने कहा है कि जीएसटी विधेयक पर कांग्रेस के अलावा हर पार्टी का समर्थन है। सिर्फ कांग्रेस ही इसके विरोध में है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को पारित करवाने के लिए सभी विकल्पों को आजमाया लेकिन वह सफल नहीं हुए। इसलिए अब बहुत हो गया।
अब कांग्रेस के साथ या कांग्रेस के बिना, जीएसटी विधेयक पारित कराया जाएगा। जानकारों का कहना है सरकार शायद संसद के अगले सत्र में ही ऐसा कर सकती है। जेटली ने कहा कि पिछले सत्र में सरकार ने 24 विधेयकों को पारित कराया, लेकिन सिर्फ जीएसटी विधेयक पर ही रोड़ा अटका रहा। उन्होंने कहा कि एक तरह से जीएसटी विधेयक पर कांग्रेस का हक बनता है क्योंकि उसी के कार्यकाल में यह तैयार हुआ। उनके दो वित्त मंत्री इससे जुडे़ रहे। इसलिए वह इसे पारित करवाने में सहयोग दे कर श्रेय ले। इसे प्रवर समिति की भी हरी झंडी मिली हुई है। पिछले सत्र के बारे में जेटली ने कहा कि उन्होंने अंतिम क्षण तक जीएसटी विधेयक पर बात करने की कोशिश की। अभी भी वह इसे पारित कराने के लिए कोशिश करेंगे। यदि इस पर आम सहमति नहीं बनती है तो संसदीय प्रक्रिया इसका निदान ढूंढ़ेगी। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संसदीय प्रक्रिया क्या होगी।
देश के सबसे बड़े बैंक, एसबीआई के निदेशक मंडल द्वारा उसके 5 सहायक बैंकों और भारतीय महिला बैंक के विलय के बारे में बीते दिन लिए गए फैसले पर जेटली ने कहा है कि यह सरकार की नीति के अनुरूप ही है। सरकार चाहती है कि छोटे-छोटे बैंकों को मिलाकर ग्लोबल साइज इंस्टीट्यूशन बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में ही बैंकों को मिलाने के बारे में रोडमैप की घोषणा कर दी थी। उनके विचार से बड़ा प्रश्न यह है कि क्या भारत में सार्वजनिक क्षेत्र में इतने बैंकों की आवश्यकता है? जेटली ने कहा कि अब बड़े ग्लोबल साइज इंस्टीट्यूशन को अस्तित्व में आना चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में विलय होने वाले बैंकों के कर्मचारियों का हित प्रभावित नहीं होगा। यदि इस बारे में सरकार के पास प्रस्ताव आता है तो वह इस पर जरूर ध्यान देंगे और सकारात्मक रूप से ध्यान देंगे।