भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय की सरकार की योजना को तर्कसंगत कदम बताते हुए इसकी प्रशंसा की है। उन्होंने देश की राजकोषीय स्थिति को तो ठीक बताया लेकिन औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों को निराशाजनक बताया।
बैंकों के विलफुल डिफाल्टर पर उन्होंने कहा कि इन्हें दंडित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। हालांकि वह रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के सवाल पर खामोश रहे।
रिजर्व बैंक के केन्द्रीय निदेशकमंडल की 551वीं बैठक में भाग लेने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में राजन ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय की सरकार की योजना को तर्कसंगत बताया।
लेकिन उन्होंने कहा कि इसमें वक्त लगेगा, यह काम रातों-रात नहीं हो सकती है। रिजर्व बैंक गवर्नर के मुताबिक इस काम में देखना होगा कि इसमें कौन फिट बैठ रहा है कौन नहीं। इस कार्य में बैंक बोर्ड ब्यूरो भी सहायता कर सकता है।