जीवन बीमा कंपनियां एक बार फिर क्षतिपूर्ति आधारित स्वास्थ्य बीमा योजनाएं भी बेच सकेंगी। दरअसल बीमा नियामक इरडा कुछ ऐसी ही तैयारी कर रहा है। इरडा ने एक सर्कुलर के माध्यम से इस प्रस्ताव की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए एक समिति का गठन किया है।
जीवन और स्वास्थ्य बीमा के साथ ही लगभग एक तरह की सलाह ही दी जाती हैं। दोनों ही काफी हद तक परामर्श आधारित उत्पाद हैं। इरडा इसके माध्यम से स्वास्थ्य बीमा बाजार को प्रोत्साहन देना चाहता है। इरडा के मुताबिक, स्वास्थ्य बीमा खंड सालाना 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है, जो काफी कम है। माना जा रहा है कि इसका लक्ष्य परामर्श आधारित बिक्री को बढ़ाना है।
क्षतिपूर्ति आधारित स्वास्थ्य योजनाएं बीमाधारक को अचानक अस्पताल में भर्ती होकर हुए इलाज पर होने वाले खर्च की भरपाई की व्यवस्था करती हैं। कुछ पॉलिसी में ओपीडी में होने वाले खर्च को भी कवर किया जाता है। निश्चित लाभ वाली योजनाओं में दावा करने पर एक निश्चित धनराशि का भुगतान किया जाता है।
इससे पहले इरडा ने 2013 में जीवन बीमा कंपनियों को व्यक्तिगत और समूह क्षतिपूर्ति आधारित स्वास्थ्य योजनाएं बेचने को मंजूरी दी थी, लेकिन 2016 में नियामक ने इस प्रावधान को वापस ले लिया और कहा कि जीवन बीमा कंपनियां सामूहिक स्वास्थ्य और बचत उत्पादों को ही बेच सकती हैं। इसके अलावा एकल प्रीमियम वाले स्वास्थ्य उत्पाद की पेशकश करने वाली बीमा कंपनियों को भी इन्हें बंद करने के लिए कह दिया गया था।
बीमाधारकों को मिलेंगे ज्यादा विकल्प
बीमा क्षेत्र के एक विशेषज्ञ ने कहा कि अभी समिति की रिपोर्ट से ही तस्वीर साफ होगी, हालांकि ‘अगर ऐसा होता है तो बीमाधारकों को फायदा होगा, क्योंकि उन्हें ज्यादा विकल्प मिलेंगे। मुझे नहीं लगता कि इससे बाजार में कोई खास बदलाव होगा, क्योंकि जीवन बीमा कंपनियों के स्वास्थ्य उत्पादों का प्रीमियम ज्यादा ही रहने की उम्मीद है।’ एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा, जीवन बीमा कंपनियां कारोबार बढ़ाने के लिए जूझ रही हैं और पूर्व में भी अपने स्वास्थ्य पोर्टफोलियो में वे खास इजाफा नहीं कर सकी थीं।