जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब केंद्र सरकार के स्वामित्व में जेएंडके बैंक भी आ जाएगा। अभी इस बैंक में 60 फीसदी हिस्सेदारी राज्य सरकार के पास है। यह राज्य का सबसे प्रमुख बैंक है, जिसकी शाखाएं पूरे राज्य में मौजूद हैं।
बैंक में नियुक्तियों का अधिकार
बैंक के बोर्ड में अब सभी महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति का अधिकार राज्य सरकार के पास न रहकर के वित्त मंत्रालय और आरबीआई के पास चला जाएगा। अभी तक इस बैंक में राज्य के सचिव के पार 55.89 फीसदी और राज्य सरकार के वित्त विभाग के पास 3.34 फीसदी की हिस्सेदारी थी। अभी बैंक को ज्यादातर वित्तीय मदद राज्य सरकार से ही मिलती है। हालांकि इसके बावजूद इसको निजी सेक्टर का बैंक माना जाता है।
लाभ में 58 फीसदी की गिरावट
जेएंडके बैंक को इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मुनाफा 58 फीसदी घटकर के 22 करोड़ रुपये पर आ गया था। सोमवार को बीएसई पर बैंक का शेयर 3.13 फीसदी गिरकर 34.10 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
आरटीआई दायरे में आएगा बैंक
राज्य प्रशासन ने यह साफ किया था कि जेके बैंक को आरटीआई के दायरे में लाया जाएगा, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। यह नहीं होगा कि किसी के बैंक के खाते की जानकारी मांगी जाए और वह दे दिया जाए। बैंक को आरटीआई के दायरे में लाने के मुद्दे पर विधानसभा में भी हंगामा हो चुका है। सत्ता में रहते हुए भाजपा के सदस्यों ने ही इसे आरटीआई के दायरे में लाने की मांग की थी। आरटीआई से बैंक की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी।
पीएसयू बनाने के प्रस्ताव का हुआ था विरोध
स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव कौंसिल (एसएसी) ने गत वर्ष नवंबर में जेके बैंक को पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। साथ ही प्रस्ताव में बैंक को राज्य विधानसभा के प्रति जिम्मेदार बनाया गया था। इस प्रस्ताव का बैंक कर्मचारियों ने सड़क पर उतरकर भारी विरोध किया था। कर्मचारियों के भारी विरोध को देखते हुए गत वर्ष चार दिसंबर को राज्यपाल ने कहा था कि विधानसभा के प्रति जिम्मेदार बनाए जाने के मामले का दोबारा परीक्षण किया जाएगा।