नौकरी बदलने के साथ समय पूर्व पिछली कंपनी के पीएफ खाते से पूरा पैसा निकालना आपके लिए घाटे का सौदा होता है। इससे आपके द्वारा नौकरी के दौरान सैलरी के एक अंश से भविष्य के लिए जो राशि बचाई गई थी, वह एक ही बार में खत्म हो जाएगी। पीएफ का पैसा आपकी बचत का पैसा होता है। इसे निकालने से आपकी पेंशन की निरंतरता भी नहीं बनी रहती।
तो फिर पीएफ का क्या करें?
पीएफ खाते का पैसा निकालने से बेहतर है कि आप अपने पुराने पीएफ खाते को नई कंपनी के पीएफ खाते से लिंक करा लें। ऐसा आप जब भी नौकरी बदले तो उसके साथ कर सकते हैं। वहीं, अगर सेवानिवृत्ति के बाद भी अगर आपको पीएफ के पैसे की ज्यादा जरूरत नहीं है तो कुछ और साल के लिए पीएफ का पैसा उसी खाते में छोड़ सकते हैं।
पीएफ पर तीन साल तक मिलेगा ब्याज
फायदे की बात ये है कि आपकी सेवानिवृत्ति के बाद भी तीन साल तक पीएफ खाते में जमा रकम पर ब्याज मिलता रहता है। तो अगर आपने तीन साल तक पैसा नहीं निकाला तो आपको उसका ब्याज भी मिलेगा। क्योंकि तीन साल तक नई रकम जमा नहीं होने पर ही पीएफ खाते को निष्क्रिय खाता माना जाता है।
पीएफ का पैसा कब - कब निकाल सकते हैं?
सामान्य तौर पर पीफ खाते का पैसा सेवानिवृत्ति के तीन साल बाद निकालना चाहिए। यही फायदेमंद होता है। हालांकि, अत्यधिक आवश्यकता होने पर इसे बीच में ही निकाला जा सकता है। जैसे यदि व्यक्ति दो माह तक बेरोजगार है या नौकरी छोड़े दो दो माह हो गए हैं और उसे पैसे की जरूरत है तो वह पीएफ का पूरा पैसा निकाल सकता है।
वहीं, नौकरी छोड़ने के एक माह के बाद 75 फीसदी पैसा निकाला जा सकता है। वहीं, 10 साल से कम नौकरी का समय है तो पेंशन का भी पूरा पैसा निकाला जा सकता है। जबकि सामान्यतया पीएफ का पूरा पैसा सेवानिवृत्ति के बाद ही निकाला जा सकता है।
अगर कोरोना में पैसे की जरूरत पड़ी तो?
कोरोना महामारी के प्रकोप को देखते हुए ईपीएफओ (EPFO) यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने कोविड-19 एडवांस स्कीम शुरू की है। इस योजना के तहत आप अपने पीएफ खाते से तीन माह के वेतन के बराबर राशि निकाल सकते हैं। हालांकि, इस योजना का लाभ बहुत अधिक आवश्यकता होने पर ही उठाना चाहिए। क्योंकि पीएफ खाते से पैसा निकालने के बाद आपके सेवानिवृत्त होने पर मिलने वाली राशि में बड़ा नुकसान हो सकता है।