पीपीएफ और डाकघर की लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों की कटौती के हालिया निर्णय को केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उचित ठहराया है। उनका कहना है कि यहां ब्याज दरों का स्तर असाधारण रूप से ऊंचा है और यदि ब्याज दरें ऊंची बनी रहीं तो अर्थव्यवस्था की विकास दर के सुस्त पड़ने का खतरा है।
जेटली ने कहा कि लघु बचत योजनाओं पर मौजूदा 8.7 फीसदी की कर मुक्त ब्याज दर वास्तव में 12.13 फीसदी बैठती है। इस हिसाब से कर्ज पर ब्याज दर 14-15 फीसदी तक होगी क्यों कि लोन पर ब्याज डिपोजिट पर मिलने वाले ब्याज दर से कुछ ऊपर ही रहता है।
उन्होंने कहा कि लघु बचतों पर भारत की ब्याज दरें असाधारण रूप से ऊंची हैं। ब्याज दर ऊंची होने से अर्थव्यवस्था की विकास दर अवरूद्ध होती है।