कई बैंकों के डेबिट कार्ड पिन की जानकारी लीक होने से करोड़ों डेबिट कार्ड उपभोक्ता असमंजस में हैं कि आखिर उनका डेबिट कार्ड सुरक्षित है, या असुरक्षित। डेबिट कार्ड के पिन नंबर चोरी होने का मामला सामने आने के बाद लोगों में अपने खाते में जमा पैसे की सुरक्षा को लेकर खासी चिंता है।
विभिन्न बैंक इस चोरी से निपटने के लिए अलग अलग उपाय कर रहे हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने डेबिट कार्ड वापस मंगवा लिए हैं।
तो एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक ने ग्राहकों को पिन बदलने की सलाह दी है। लेकिन किसी भी बैंक से ग्राहकों को यह जानकारी नहीं मिल रही है कि आखिर मुद्दा क्या है और क्या इस समस्या से वो पिन बदलने के बाद भी सुरक्षित रहेंगे?
क्या है मुद्दा?
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बीबीसी ने इस मामले और डेटा चोरी की जाँच कर रही एक पेमेंट सर्टिफिकेशन एंड ऑडिट एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी से बात की और उन्होंने बोलचाल की भाषा में इस समस्या को समझाया।
उनके अनुसार, ग्राहकों के डेबिट कार्ड की यह चोरी एक खास पेंमेंट सर्विस (एटीएम की कार्यप्रणाली) उपलब्ध करवाने वाली कंपनी हिताची पेमेंट सर्विसेज के सॉफ्टवेयर में लगी सेंध से शुरू हुई। हिताची पेमेंट की सर्विस सिर्फ कुछ ही बैंक ले रहे थे और इन बैंको के लगभग 90 एटीएम में चल रहे हिताची के सॉफ्टवेयर को अज्ञात साइबर अपराधियों ने हैक कर लिया। इसके बाद इन साइबर अपराधियों के पास इन 90 एटीएम में डाले गए सभी पिन नंबर्स की जानकारी आ गई।
इस जाँच अधिकारी के मुताबिक पिन नंबर बहुत ही संवेदनशील जानकारी है लेकिन सिर्फ पिन नंबर जान लेने से भी आपका पैसा आसानी से चोरी नहीं हो सकता। क्योंकि आजकल किसी भी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए पिन के साथ आपको मोबाइल पर भेजा गया वन टाईम पासवर्ड भी देना होता है।ओटीपी के चलते लगभग ढरों कार्ड्स की जानकारी चोरी हो जाने के बाद भी सिर्फ कुछ ही लोग धोखाधड़ी का शिकार हो पाए।
हैकर्स ने क्या किया?
साइबर क्राइम
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पिन जान लेने के बाद अज्ञात हैकर्स ने इन ग्राहकों को अज्ञात नंबरों से फोन किया और खुद को बैंक कर्मचारी बताते हुए ग्राहकों से जानकारियां मांगी। जिन लोगों ने पासवर्ड दे दिए, उन्हें भारी नुकसान हुआ। आईसीआईसीआई बैंक के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, "हमें ऐसे कार्ड्स की जानकारी मिल चुकी है जिन्हें संदिग्ध एटीएम पर इस्तेमाल किया गया है।
हम इनके पासवर्ड बदल रहे हैं।" लेकिन जाँच अधिकारी बताते हैं कि इस धोखेधड़ी को बैंक पहले भी रोक सकते थे,"हमारी जाँच अभी चल रही है। लेकिन हम इतना कह सकते हैं कि हिताची के सॉफ्टवेयर इस्तेमाल कर रहे बैंको को इस गड़बड़ी का पता पहले लग गया होगा और वो इसे अपने स्तर पर सुलझाने की कोशिश करते रहे होंगे।"
किसी बैंक का डेटा ब्रीच हो जाना एक बेहद बड़ी गलती मानी जाती है और बैंक की गलती या डेटा चोरी से किसी ग्राहक को हुआ पैसे का नुकसान भी बैंक को ही भरना पड़ता है। हम किसी बैंक पर आरोप नहीं लगा सकते हैं लेकिन इस मामले को कुछ प्राइवेट बैंक अपने स्तर पर सुलझाने की कोशिश कर रहे थे। और यह ब्रैंड का नाम बचाने की कोशिश थी। लेकिन जब एक सरकारी बैंक का डेटा इन खराब एटीएम के चलते चोरी हुआ तो फिर मामला आरबीआई तक पहुंच गया।
तीन बेहद महत्वपूर्ण बातें
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आम आदमी के लिए इस मामले में तीन बातें बेहद महत्वपूर्ण हैं और जिनका ग्राहकों के पैसे से सीधा संबंध है।
-अगर आपने अपने बैंक के अलावा किसी और बैंक का एटीएम इस्तेमाल किया है तो अपना पिन बदल लें और यदि आपके बैंक से पिन बदलने का मैसेज आया
है तो भी इस पर तुरंत अमल करें।
-आरबीआई का यह नियम है कि बैंक के सिस्टम की कमी के चलते हुई पैसों की चोरी पर बैंक को ग्राहक को उसका पैसा लौटाना होगा, ऐसे में आपके पैसे की
सुरक्षा इस वक्त इन बैंको के लिए ज्यादा बड़ा सिरदर्द बनी हुई है।
-सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर आपको किसी भी एटीएम मशीन की स्क्रीन पर 'सर्वर एरर', 'सर्वर नॉट कनेक्टेड' या पिन दोबारा एंटर करने के लिए
कहा जाता है तो उस एटीएम को बिल्कुल इस्तेमाल न करें और संबंधित बैंक को इसकी सूचना दें।
अधिकारियों ने सभी डेबिट कार्ड उपभोक्ताओं को आश्वासन दिया है कि उन्होंने ऐसे सभी डेबिट कार्डों की पहचान कर ली है जिनके पिन चोरी होने का संदेह है या जिन्हें संदिग्ध एटीएम में इस्तेमाल किया गया था। इन सभी डेबिट कार्ड के मालिकों को पिन नंबर या कार्ड नंबर बदलने का संदेश भेजा जा रहा है। इसलिए अगर आपको बैंक का संदेश आया है तो पिन बदलिए, आपका कार्ड सुरक्षित है। अगर बैंक का संदेश नहीं आया है तो भी पिन बदल लीजिए।