वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बेहतरी के लिए सुधार जारी रहेगा। फिलहाल इनके लिए तीन उपाय किए गए हैं। इसके साथ ही इनके लिए कुछ विधायी उपाय भी किए जा रहे हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ शुक्रवार को समीक्षा बैठक करने के बाद उन्होंने संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा कि अब सरकारी बैंकों को तीन तरह की स्वतंत्रता मिली है। पहला कि उन्हें फैसले लेने के लिए ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। उन्हें फैसले लेने में कोई डिक्टेट नहीं करेगा। दूसरा कि वे मामले का अध्ययन कर जो उचित निर्णय लेंगे, उसका सम्मान किया जाएगा।
तीसरा कि उनके लिए सरकार ऐसा वातावरण तैयार करेगी, जिसमें समस्याओं का बेहतर तरीके से समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि सोमवार की बैठक में विभिन्न विषयों पर खुलकर चर्चा हुई। बैंकों को अधिकार संपन्न बनाने तथा वातावरण में ऐसे सुधार के सुझाव पेश किए ताकि वाणिज्यिक दृष्टि से समुचित फैसले किए जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार इस संबंध में पूरी तरह से बैंकों के समर्थन के लिए प्रतिबद्ध है। वित्त मंत्री के मुताबिक विधायी उपायों से बैंकों को सुधार के पथ पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
दिवालिया एवं शोधन अक्षमता संहिता संसद से पारित कराया जा चुका है। यह जल्दी ही लागू हो जाएगा। इसके अलावा ऋण वसूली कानून में और प्रतिभूतिकरण कानून में संशोधन के प्रस्ताव इस समय संसद की संयुक्त समिति के समक्ष हैं। संयुक्त समिति इस पर विचार कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि संसद के अगले सत्र में यह भी पारित हो जाएगा।