प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुप्रचारित और पांच साल तक सब्सिडी वाली अटल पेंशन योजना लोगों को आकर्षित करने में कोई खास सफल नहीं हो पाई है।
बीते 9 मई को जारी इस योजना में अभी तक लक्ष्य के मुकाबले चार फीसदी से भी कम लोगों ने ही इनरोल कराया है। जबकि इसके साथ जारी दो अन्य बीमा योजनाओं में इनरोल कराने वाले लोगों का आंकड़ा 11 करोड़ से भी ऊपर पहुंच गया है।
केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 19 सितंबर 2015 तक अटल पेंशन योजना में 7.68 लाख लोगों ने ही इनरोल कराया था जबकि सरकार ने 31 दिसंबर 2015 तक बैंकों को कम से कम दो करोड़ लोगों को इसमें इनरोल करने का जिम्मा दिया है। यह लक्ष्य के मुकाबले 4 फीसदी से भी कम है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में तो अटल
पेंशन योजना इक्का-दुक्का ही खुल पा रही है।
अभी तक देशभर के गांवों में महज 1.56 लाख पुरुषों एवं 97,100 महिलाओं ने इसमें इनरोल कराया है। शहरी इलाकों में देखे तो 3.01 लाख पुरुषों और 2.13 लाख महिलाओं ने इस योजना के तहत खाता खुलवाया है।
लंबा लॉक-इन पीरियड बन रहा अवरोध
इस योजना में लोगों की रुचि क्यों नहीं है, इस सवाल पर एक अग्रणी सरकारी बैंक के अध्यक्ष ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि इसमें काफी लंबा लॉक इन पीरियड है।
उदाहरण के लिए यदि कोई 20 साल का व्यक्ति अभी खाता खुलवाता है तो उसकी राशि 40 साल तक फंसी रहेगी। इस बीच यदि उसे कोई आपात स्थिति आती है तो भी उसे पूरे पैसे नहीं मिलेंगे। हालांकि बाद में वित्त मंत्रालय ने नियम को कुछ लचीला बनाया लेकिन वह भी लोगों को आकर्षित करने में सफल नहीं हुआ है।
एक अर्थशास्त्री के अध्ययन के हवाले से कहा जा रहा है कि 30 साल बाद जब किसी व्यक्ति को 5,000 रुपये पेंशन मिलेगी, तो उसका वैल्यू आज के 125 रुपये के बराबर होगा। मतलब ऊंट के मुंह में जीरा।
अटल पेंशन योजना में 18 से 40 साल के उम्र के व्यक्ति को पात्र बनाया गया है। ये अगर प्रतिमाह 42 रुपये से 1,452 रुपये तक की राशि जमा करते हैं तो उनको 60 साल पूरा होने पर उनके द्वारा जमा की गयी पूंजी के हिसाब से 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की राशि प्रति महीने पेंशन के रूप में मिलेगी।
इसमें पांच साल तक हर लाभार्थी को प्रीमियम में 50 फीसदी राशि (प्रति वर्ष अधिकतम 1,000 रुपये) केन्द्र सरकार से सब्सिडी भी मिलेगी।