डिजिटल लेनदेन या डाटा सुरक्षा के मद्देनजर साइबर बीमा लेने वालों के हितों की सुरक्षा के मद्देनजर केंद्र सरकार दिशा-निर्देश तैयार कर रही है। तकनीकी मामलों से जुड़े इस बीमा के गुण-दोषों को इलेक्ट्रॉनिक और सूचना मंत्रालय परख रहा है। इसके लिए बीमा कंपनियों से डाटा लिया गया है और विशेषज्ञों से जल्द राय ली जाएगी।
60 करोड़ रुपये का है कारोबार
उल्लेखनीय है कि फिलहाल देश में साइबर बीमा का कारोबार बहुत छोटा करीब 60 करोड़ रुपये का है। मौजूदा समय में देश में कई सरकारी और गैर-सरकारी कंपनियां ऐसे बीमा लोगों को मुहैया करा रही हैं। आईटी मंत्रालय ने साइबर बीमा की मांग को खारिज करने की शर्तों और वजहों पर चर्चा की है, जिसमें बीमा कंपनियों ने भी विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय दी है।
तेजी से बढ़ी मांग
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, साइबर बीमा की मांग देश में तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इसके तकनीकी पहलुओं पर अभी तक कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं। इसलिए मंत्रालय उन पहलुओं पर उपभोक्ता के हितों के बचाव के लिए काम कर रहा है, जिन मसलों पर आईआरडीएआई के लिए हकीकत तय कर पाना मुमकिन नहीं है।
जल्द लाए जाएंगे नियम
उन्होंने कहा कि सभी हिस्सेदारों से विचार-विमर्श कर दिशा-निर्देश या नियम लाए जाएंगे, जिनका पालन करना साइबर बीमा मुहैया कराने वाली सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य होगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय डाटा नीति पर विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें अगले माह मई में आ जाएंगी। उम्मीद है कि साइबर बीमा मुद्दे पर सिफारिशों से हमें सहायता मिलेगी।