सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र को मजबूती देने के लिए तीन बैंकों देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के विलय विलय का फैसला किया है जिसे वित्त मंत्रालय की सैद्घांतिक मंजूरी भी मिल गई है। इस विलय से तैयार होने वाला नया बैंक एसबीआई और आईसीआईसीआई के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक हो जिसका कुल पूंजीकरण 14 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा। इसी तरह सरकार ने आईडीबीआई बैंक में अपनी 51 फीसदी हिस्सेदारी को सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी को बेचने का भी फैसला किया है।
आरबीआई-सरकार में विवाद
पीसीए के नियमों में ढील और केंद्रीय बैंक के पास आरक्षित पूंजी का कुछ हिस्सा मांगने को लेकर आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच लंबे समय तक विवाद रहा। सरकार की मंशा थी कि आरबीआई पीसीए नियमों में कुछ ढील दे जिससे बैंक कर्ज बांटना शुरू कर सकें। साथ ही केंद्रीय बैंक की आरक्षित पूंजी में से 3 लाख करोड़ रुपये बाजार में लाने का भी सुझाव दिया था जिसे आरबीआई ने आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए ठुकरा दिया था।
कई दिग्गजों की हुई विदाई
इस साल बैंकिंग क्षेत्र के कई दिग्गजों की विवादों में फंसने के बाद विदाई हो गई। आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक चंदा कोचर को वीडियोकॉन फर्जीवाड़ा मामले में कथित आरोपों पर पद छोड़ना पड़ा तो एक्सिस बैंक की प्रबंध निदेशक शिखा शर्मा और यस बैंक के सीईओ राणा कपूर का कार्यकाल बढ़ाने से आरबीआई ने इनकार कर दिया जिसके बाद इन दिग्गजों को भी पद से हटना पड़ा। सबसे बड़ा झटका इस माह की शुरुआत में आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने दिया जब उन्होंने निजी कारणों के हवाले से इस्तीफा दे दिया।