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पांच घटनाओं से इस साल बैंकिंग क्षेत्र में रही उथल-पुथल

Thu, 27 Dec 2018 10:41 AM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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वर्ष 2018 में बैंकिंग क्षेत्र में कई विवादों और बदलावों का दौर रहा। एक तरफ फंसे कर्ज और धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों ने इस क्षेत्र की रफ्तार पर रोक लगाई तो कुछ मुद्दों पर आरबीआई और सरकार के बीच हुए विवादों ने भी इसकी मुश्किलों को बढ़ाया।

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खराब कर्ज से दबे 12 सरकारी बैंकों को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के तहत लाना भी बैंकिंग क्षेत्र की प्रगति में बाधक रहा। इसी तरह बैंकों के विलय का फैसला और आरबीआई गवर्नर के इस्तीफे जैसे पांच ऐसे बड़े कारक रहे जिनसे पूरे साल बैंकिंग क्षेत्र में उथल-पुथल का दौर रहा।

धोखाधड़ी और एनपीए

साल की शुरुआत सबसे बड़े बैंकिंग फर्जीवाड़े के साथ हुई जब हीरा व्यापारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने पंजाब नेशनल बैंक में करीब 14 हजार करोड़ का फर्जीवाड़ा किया। इससे बैंकों का एनपीए और बढ़कर मार्च में 8 लाख 95 हजार करोड़ से ज्यादा पहुंच गया।
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बाद में सरकार ने फंसे कर्ज की वसूली के लिए कई अभियान चलाए और वित्त वर्ष की पहली छमाही अप्रैल-सितंबर में एनपीए के 23 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली की।

पीसीए से बाहर आएंगे कुछ बैंक

फंसे कर्ज के बढ़ते मामलों से घाटे में चल रहे 11 सरकारी बैंकों को आरबीआई ने त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के तहत निगरानी में डाल दिया था। इसके बाद इन बैंकों को नया कर्ज देने पर रोक लगा दी थी।

अब बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों और सरकार की ओर से 1.06 लाख करोड़ की पूंजी सहायता मिलने के बाद 4-5 बैंक आरबीआई की निगरानी से बाहर आ सकते हैं। इसमें इलाहाबाद बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, देना बैंक, कॉरपोरेशन बैंक और आईडीबीआई बैंक शामिल हो सकते हैं।

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बैंकों का विलय और विनिवेश

सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र को मजबूती देने के लिए तीन बैंकों देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के विलय विलय का फैसला किया है जिसे वित्त मंत्रालय की सैद्घांतिक मंजूरी भी मिल गई है। इस विलय से तैयार होने वाला नया बैंक एसबीआई और आईसीआईसीआई के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक हो जिसका कुल पूंजीकरण 14 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा। इसी तरह सरकार ने आईडीबीआई बैंक में अपनी 51 फीसदी हिस्सेदारी को सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी को बेचने का भी फैसला किया है। 

आरबीआई-सरकार में विवाद

पीसीए के नियमों में ढील और केंद्रीय बैंक के पास आरक्षित पूंजी का कुछ हिस्सा मांगने को लेकर आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच लंबे समय तक विवाद रहा। सरकार की मंशा थी कि आरबीआई पीसीए नियमों में कुछ ढील दे जिससे बैंक कर्ज बांटना शुरू कर सकें। साथ ही केंद्रीय बैंक की आरक्षित पूंजी में से 3 लाख करोड़ रुपये बाजार में लाने का भी सुझाव दिया था जिसे आरबीआई ने आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए ठुकरा दिया था।

कई दिग्गजों की हुई विदाई

इस साल बैंकिंग क्षेत्र के कई दिग्गजों की विवादों में फंसने के बाद विदाई हो गई। आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक चंदा कोचर को वीडियोकॉन फर्जीवाड़ा मामले में कथित आरोपों पर पद छोड़ना पड़ा तो एक्सिस बैंक की प्रबंध निदेशक शिखा शर्मा और यस बैंक के सीईओ राणा कपूर का कार्यकाल बढ़ाने से आरबीआई ने इनकार कर दिया जिसके बाद इन दिग्गजों को भी पद से हटना पड़ा। सबसे बड़ा झटका इस माह की शुरुआत में आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने दिया जब उन्होंने निजी कारणों के हवाले से इस्तीफा दे दिया।
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