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भविष्य में और बैंकों का हो सकता है विलय, जेटली ने फिर बताई जरूरत

Thu, 28 Feb 2019 06:34 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को एक बार फिर छोटे और कमजोर सरकारी बैंकों के विलय का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए बड़े और सेहतमंद बैंकों की जरूरत होगी, इसलिए सरकार बैंकों के विलय की अपनी नीति पर कायम है।

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जेटली ने कहा कि पिछले दो, तीन तिमाहियों से सरकारी बैंकों की एनपीए स्थिति में सुधार आया है। बैंकों और बैंकिंग तंत्र को मजबूत बनाने के लिए विधायिका सहित जो भी जरूरी कदम होंगे, उठाए जाएंगे। ताकि, वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें। 

इंडियन बैंक एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों का फंसा कर्ज या एनपीए तेजी से कम हो रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब बैड लोन छिपा नहीं रह गया है। आरबीआई सभी बैंकों को तनाव वाली संपत्तियां कम करने के लिए समाधान पेश कर रहा है, जिससे बैंकों में मजबूती आ सके। उन्होंने कहा कि 2014-15 से दिसंबर, 2018 तक सरकारी बैंकों ने कुल 2.87 लाख करोड़ रुपये का बैड लोन वसूला है। इसमें से 98,493 करोड़ रुपये की वसूली चालू वित्त वर्ष के शुरुआती नौ महीने में की गई है। 

अप्रैल के बाद होगा विचार

भविष्य में बैंकों के विलय की योजनाओं पर एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि तीन बैंकों की विलय प्रक्रिया पहले से चल रही है, जो 1 अप्रैल को लागू हो जाएगा। इनकी सफलता देखने के बाद ही और बैंकों के विलय पर विचार किया जाएगा। अभी सरकारी बैंकों की स्थिति काफी बेहतर है और एपीए घटने के साथ उनके मुनाफे में इजाफा हो रहा है। मौजूदा बैंकिंग क्षेत्र 15 फीसदी की दर से विकास कर रहा है। 

आरबीआई डालेगा 1 लाख करोड़ रुपये

मार्च में वित्त वर्ष की समाप्ति पर नकदी संकट बढ़ने की आशंका को देखते हुए आरबीआई ने 1 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी देने का फैसला किया है। यह राशि 25-25 हजार करोड़ के स्लैब में चार चरणों में दी जाएगी। जिन बैंकों को साल के आखिर में पूंजी की जरूरत होगी, वे विभिन्न दरों पर छोटी अवधि के लिए आरबीआई से ये राशि ले सकेंगे। केंद्रीय बैंक ने अपने सर्कुलर में कहा कि 6, 11, 14 और 20 मार्च को इस राशि के लिए बैंकों से बोलियां ली जाएंगी।  

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