वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को एक बार फिर छोटे और कमजोर सरकारी बैंकों के विलय का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए बड़े और सेहतमंद बैंकों की जरूरत होगी, इसलिए सरकार बैंकों के विलय की अपनी नीति पर कायम है।
भविष्य में बैंकों के विलय की योजनाओं पर एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि तीन बैंकों की विलय प्रक्रिया पहले से चल रही है, जो 1 अप्रैल को लागू हो जाएगा। इनकी सफलता देखने के बाद ही और बैंकों के विलय पर विचार किया जाएगा। अभी सरकारी बैंकों की स्थिति काफी बेहतर है और एपीए घटने के साथ उनके मुनाफे में इजाफा हो रहा है। मौजूदा बैंकिंग क्षेत्र 15 फीसदी की दर से विकास कर रहा है।
मार्च में वित्त वर्ष की समाप्ति पर नकदी संकट बढ़ने की आशंका को देखते हुए आरबीआई ने 1 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी देने का फैसला किया है। यह राशि 25-25 हजार करोड़ के स्लैब में चार चरणों में दी जाएगी। जिन बैंकों को साल के आखिर में पूंजी की जरूरत होगी, वे विभिन्न दरों पर छोटी अवधि के लिए आरबीआई से ये राशि ले सकेंगे। केंद्रीय बैंक ने अपने सर्कुलर में कहा कि 6, 11, 14 और 20 मार्च को इस राशि के लिए बैंकों से बोलियां ली जाएंगी।