अब सरकारी बैंकों के अधिकारी को बिना किसी दबाव और भय के व्यावसायिक रूप से सही फैसले लेना आसान हो जाएगा। दरअसल भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी सीवीसी ने बैंक धोखाधड़ी के मामलों की जांच और कार्रवाई की सिफारिश के वास्ते पूर्व सतर्कता आयुक्त टी एम भसीन की अगुआई में एक सलाहकार बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड 50 करोड़ रुपये से ज्यादा के मामलों की जांच करेगा। यह कदम हाल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के ईमानदारीपूर्ण फैसलों को प्रोत्साहन दिए जाने के आह्वान को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
यह घटनाक्रम सही फैसलों के लिए बैंकरों को मुकदमेबाजी से सुरक्षा देने और कर्ज दिए जाने को बढ़ावा देने के लिहाज से भी खासा अहम है। यह तय करेगा कि मामला आपराधिक है या व्यावसायिक तौर पर सही फैसला है। इस क्रम में भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों की भी सिफारिश की जाएगी।
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के इस कदम के बारे में पूछने पर वित्त सचिव राजीव कुमार ने कहा कि इससे बैंकर बिना किसी भय के सही और व्यावसायिक रूप से उचित फैसले लेने में सक्षम हो जाएंगे। पिछले अवतार में समिति को ‘बैंक, व्यावसायिक, वित्तीय धोखाधड़ी पर परामर्शक बोर्ड’ नाम दिया गया था।
सीवीसी के एक आदेश के मुताबिक, बैंकिंग धोखाधड़ी के लिए सलाहकार बोर्ड (एबीबीएफ), सरकारी बैंकों (पीएसबी) द्वारा जांच एजेंसियों को सिफारिश या संदर्भ भेजने से पहले धोखाधड़ी के सभी बड़े मामलों की पहले स्तर की जांच करेगा। एबीबीएफ का गठन आरबीआई से परामर्श के बाद किया गया है।
आदेश में कहा गया कि चार सदस्यीय बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में ऐसे मामले होंगे, जिसमें ऋण खाते में धोखाधड़ी के आरोपों में महाप्रबंधक और उससे ऊपर के अधिकारियों के नाम आए हों। इसके अलावा ऋणदाता को 50 करोड़ रुपये से बड़े सभी मामले बोर्ड के पास भेजने होंगे और उससे मिली सिफारिश या सलाह पर संबंधित बैंक को मामले में आगे की कार्रवाई करनी होगी।
सदस्यों का कार्यकाल होगा दो साल
सीवीसी ने कहा, ‘केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई भी ऐसे किसी मामले को बोर्ड के पास भेज सकती है, जहां संबंधित पीएसबी के साथ कोई मुद्दा या समस्या या तकनीकी पहलू जुड़ा हुआ हो।’ दूसरे सदस्यों में पूर्व शहरी विकास सचिव, बीएसएफ के पूर्व महानिदेशक और आंध्रा बैंक के एमडी व सीईओ सुरेश एन पटेल शामिल हैं। आदेश के मुताबिक, चेयरमैन और सदस्यों का कार्यकाल दो साल होगा।
आरबीआई करेगा सहयोग
इसमें आगे कहा गया कि बोर्ड समय-समय पर वित्तीय प्रणाली में होने वाले धोखाधड़ी के मामलों का विश्लेषण करेगा और आरबीआई को इसके निष्कर्षों से अवगत कराएगा, जिससे नीतियां बनाना आसान हो जाएगा। आरबीआई दिल्ली में बोर्ड के मुख्यालय को जरूरी वित्तपोषण के साथ ही सचिव सेवाएं, लॉजिस्टिक और विश्लेषणात्मक सहयोग उपलब्ध कराएगा।