पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने 500 और 1000 के नए नोटों को प्रचलन से बाहर करने के मोदी सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने ने कहा कि नए नोट लाने पर 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इससे पहले वर्ष 1978 में भी मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार के समय 1000 का नोट वापस लेने का फैसला किया गया था जो कि नाकाम रहा था।
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने लोगों की परेशानियों का ध्यान नहीं रखा। साथ ही सरकार से जल्द पुराने नोट बदलने की अपील की। चिदंबरम ने कहा कि अब 2000 रुपये का नोट लाने का फैसला हैरानी भरा लगता है। उन्होंने कहा कि 2000 के नोट का फायदा समझ में नहीं आ रहा। कालेधन पर लगाम लगाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, आज कालेधन का मतलब सिर्फ कैश नहीं है।
Bulk of this money is legitimate money; Govt and banks owe a duty to people to exchange it quickly: P Chidambaram pic.twitter.com/91avp9Whv5
— ANI (@ANI_news) November 9, 2016
Empirical evidence tells unaccounted wealth is largely stashed away in construction,jewellery;don't know hw much is in hard cash-Chidambaram
— ANI (@ANI_news) November 9, 2016
The test will be how quickly the old notes will be replaced by new when they are legally tendered in banks: P Chidambaram, Former FM pic.twitter.com/3S6Dexd8LS
— ANI (@ANI_news) November 9, 2016