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आसान नहीं होगा बैंकों का विलय करना, इसलिए लगेगा तीन साल का समय

Mon, 02 Sep 2019 05:30 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्र सरकार द्वारा 10 बैंकों का विलय करके चार बैंक बनाने की घोषणा करने के बाद इनका पूरी तरह से विलय करना आसान नहीं होगा। इनके विलय में कम से कम तीन साल का समय लगेगा। सबसे ज्यादा समय तकनीकी विलय में लगने की संभावना है। विभिन्न बैंकों की वेबसाइट, मोबाइल एप्स, आईवीआर में बदलाव लाने के लिए इन बैंकों को सबसे ज्यादा काम करना होगा। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा, ताकि बैंकिंग जानकारी में कोई हैकर सेंध न लगा सके।

कोर बैंकिंग में भी करना होगा बदलाव

बैंकों को अपने कोर बैंकिंग टेक्नोलॉजी में भी बदलाव करना होगा। इसमें बहुत सारे डाटा और एनालिटिक्स की जरूरत पड़ेगी। कोर बैंकिंग में एकरूपता लाने के लिए भी बैंकों को अपने सॉफ्टवेयर में बड़े बदलाव करने होंगे। अब सब बैंकों में बैंकिंग पूरी तरह से डिजिटल हो चुकी है। बैंक ग्राहकों की जानकारी से लेकर के लेन-देन का ब्यौरा भी रखते हैं। ऐसे में बैंकों को डिजिटल तौर पर सशक्त होने के लिए इस कार्य पर भी बहुत पैसा खर्च करना होगा। 

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इन बैंकों का होगा विलय

बैंक 1: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया+कॉरपोरेशन बैंक+आंध्रा बैंक

बैंक 2: इंडियन बैंक+इलाहाबाद बैंक

बैंक 3: यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया+ओरियंटल बैंक ऑफ इंडिया+पंजाब नेशनल बैंक

बैंक 4: केनरा बैंक+सिंडिकेट बैंक

पंजाब नेशनल बैंक में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक का विलय होगा। ये दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक होगा, जो पीएनबी से 1.5 गुना बड़ा होगा। वहीं केनरा बैंक का विलय सिंडिकेट बैंक में होगा, जो देश का चौथा सबसे बड़ा बैंक होगा।

 

जबकि इंडियन बैंक का विलय इलाहाबाद में बैंक में किया गया है। इसके अलावा यूनियन बैंक, आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का विलय होगा, जो देश का पांचवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनेगा।

इसलिए किया विलय

कई सरकारी बैंकों का एनपीए काफी बढ़ गया है। ऐसे में सरकार के पास विलय करना मजबूरी है। जानकारों के मुताबिक कई बैंकों का एनपीए सात फीसदी के पार जा चुका है। ऐसे में विलय करने से सरकार बैंकों के एनपीए को कम कर सकेगी। रिसर्च कंपनी कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के सीईओ राजीव सिंह ने बताया कि बैंकों के लिए एनपीए बड़ी समस्या है।

 

बैंकों के विलय से एनपीए की समस्या से निजात मिलेगी। अभी सरकारी बैंकों का 88 फीसदी बिजनेस इन 10 बैंकों से चार बैंकों के पास चला जाएगा। इससे इन 10 सरकारी बैंकों का एनपीए पांच से सात फीसदी तक कम होने की उम्मीद है। 

बैंकों के विलय से ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर ?

  • इस विलय के बाद ग्राहकों को नई खाता संख्या और कस्टमर आईडी मिल सकती है। 
  • जिन ग्राहकों को नए अकाउंट नंबर या IFSC कोड जारी होंगे, उन्हें इनकी जानकारी आयकर विभाग, इंश्योरंस कंपनियों, म्यूचुअल फंड, नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) और दूसरी सरकारी योजनाओं में अपडेट करानी होंगी। 
  • जिन ग्राहकों की SIP या लोन ईएमआई चल रही है, उन्हें नया इंस्ट्रक्शन फॉर्म भरना पड़ सकता है। 
  • इसके अलावा नई चेकबुक, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड भी जारी हो सकता है। 
  • फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) या रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) पर मिलने वाले ब्याज में कोई बदलाव नहीं होगा।

क्या लोन की ब्याज दरों में होगा बदलाव ?

जिन ब्याज दरों पर व्हीकल लोन, होम लोन, पर्सनल लोन आदि लिए गए हैं, वह स्थिर रहेगी और कोई बदलाव नहीं होगा। विलय के बाद कुछ शाखाएं बंद होंगी, जिसके लिए ग्राहकों को नई शाखाओं में जाना पड़ेगा।

क्यों हुआ बैंकों का विलय ?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि पिछले साल तीन बैंकों के विलय से फायदा हुआ, रिटेल लोन ग्रोथ में 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 50 साल पहले जुलाई 1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था।

क्या बैंकों के विलय से दूर होगी एनपीए की समस्या ?

कई सरकारी बैंकों का एनपीए काफी बढ़ गया है। ऐसे में सरकार के पास विलय करना मजबूरी है। जानकारों के मुताबिक कई बैंकों का एनपीए सात फीसदी के पार जा चुका है। ऐसे में विलय करने से सरकार बैंकों के एनपीए को कम कर सकेगी। बैंकों के लिए एनपीए बड़ी समस्या है। बैंकों के विलय से एनपीए की समस्या से निजात मिलेगी। अभी सरकारी बैंकों का 88 फीसदी बिजनेस इन 10 बैंकों से चार बैंकों के पास चला जाएगा। इससे इन 10 सरकारी बैंकों का एनपीए पांच से सात फीसदी तक कम होने की उम्मीद है। 
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