केंद्र सरकार द्वारा 10 बैंकों का विलय करके चार बैंक बनाने की घोषणा करने के बाद इनका पूरी तरह से विलय करना आसान नहीं होगा। इनके विलय में कम से कम तीन साल का समय लगेगा। सबसे ज्यादा समय तकनीकी विलय में लगने की संभावना है। विभिन्न बैंकों की वेबसाइट, मोबाइल एप्स, आईवीआर में बदलाव लाने के लिए इन बैंकों को सबसे ज्यादा काम करना होगा। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा, ताकि बैंकिंग जानकारी में कोई हैकर सेंध न लगा सके।
बैंकों को अपने कोर बैंकिंग टेक्नोलॉजी में भी बदलाव करना होगा। इसमें बहुत सारे डाटा और एनालिटिक्स की जरूरत पड़ेगी। कोर बैंकिंग में एकरूपता लाने के लिए भी बैंकों को अपने सॉफ्टवेयर में बड़े बदलाव करने होंगे। अब सब बैंकों में बैंकिंग पूरी तरह से डिजिटल हो चुकी है। बैंक ग्राहकों की जानकारी से लेकर के लेन-देन का ब्यौरा भी रखते हैं। ऐसे में बैंकों को डिजिटल तौर पर सशक्त होने के लिए इस कार्य पर भी बहुत पैसा खर्च करना होगा।
बैंक 1: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया+कॉरपोरेशन बैंक+आंध्रा बैंक
बैंक 2: इंडियन बैंक+इलाहाबाद बैंक
बैंक 3: यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया+ओरियंटल बैंक ऑफ इंडिया+पंजाब नेशनल बैंक
बैंक 4: केनरा बैंक+सिंडिकेट बैंक
पंजाब नेशनल बैंक में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक का विलय होगा। ये दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक होगा, जो पीएनबी से 1.5 गुना बड़ा होगा। वहीं केनरा बैंक का विलय सिंडिकेट बैंक में होगा, जो देश का चौथा सबसे बड़ा बैंक होगा।
जबकि इंडियन बैंक का विलय इलाहाबाद में बैंक में किया गया है। इसके अलावा यूनियन बैंक, आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का विलय होगा, जो देश का पांचवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनेगा।
कई सरकारी बैंकों का एनपीए काफी बढ़ गया है। ऐसे में सरकार के पास विलय करना मजबूरी है। जानकारों के मुताबिक कई बैंकों का एनपीए सात फीसदी के पार जा चुका है। ऐसे में विलय करने से सरकार बैंकों के एनपीए को कम कर सकेगी। रिसर्च कंपनी कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के सीईओ राजीव सिंह ने बताया कि बैंकों के लिए एनपीए बड़ी समस्या है।
बैंकों के विलय से एनपीए की समस्या से निजात मिलेगी। अभी सरकारी बैंकों का 88 फीसदी बिजनेस इन 10 बैंकों से चार बैंकों के पास चला जाएगा। इससे इन 10 सरकारी बैंकों का एनपीए पांच से सात फीसदी तक कम होने की उम्मीद है।