इस धोखाधड़ी के संबंध में सीबीआई को भेजे गए पत्र में स्टेट बैंक ने कहा है कि कनिष्क गोल्ड को 2007 में लोन दिया गया था। समय बीतने के साथ उसकी क्रेडिट लिमिट और वर्किंग कैपिटल लोन की लिमिट बढ़ती गई। वर्ष 2008 में स्टेट बैंक ने आईसीआईसीआई से कंपनी का लोन खरीदा था। तब कंपनी पर 50 करोड़ वर्किंग कैपिटल के मद में और 10 करोड़ मियादी लोन के रूप में बकाया था। इसके बाद मार्च, 2011 में पीएनबी और बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर स्टेट बैंक ने कंपनी को लोन दिया और 2012 में स्टेट बैंक की अगुवाई में बने कंसोर्टियम ने उसे मेटल गोल्ड लोन मंजूर किया।
मार्च 2017 में पहली बार कंपनी ने सभी 14 बैंकों की लोन की किश्त चुकाना बंद कर दिया था। इसके बाद एसबीआई ने 11 नवंबर 2017 को पहली बार आरबीआई को फ्रॉड होने की सूचना दी। इसके बाद जनवरी 2018 में अन्य बैंकों ने आरबीआई को फ्रॉड होने की सूचना देकर के आगे की कार्रवाई करने के लिए कहा।
मई में बंद मिला ऑफिस, फैक्टरी और शोरूम
बैंकों ने 5 अप्रैल 2017 को सबसे पहले कंपनी का स्टॉक ऑडिट करना शुरू किया। लेकिन तब भी कंपनी के प्रमोटर से संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद 25 मई को जब बैंकों ने कनिष्क के ऑफिस, फैक्टरी और शोरूम का दौरा किया तो वहां पर ताला लटका मिला।
krizz नाम से खोली थी फैक्टरी
भूपेश ने हाल ही क्रिज नाम से चेन्नई में ज्वेलरी बनाने की फैक्टरी खोली थी। यह फैक्टरी केवल व्यापारियों के लिए थी, जो कंपनी से सीधे गोल्ड ज्वैलरी खरीद सकते थे।