ऑल इंडिया बैंक एंप्लाईज एसोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने भी इसी तरह के स्वर में कहा कि अब हर कोई इस बात से अवगत हो चुका है कि बैंकिंग सेक्टर में कथित रूप से दक्ष माने जाने वालों की असली हालत क्या है।
उन्होंने कहा कि जब से पंजाब नेशनल बैंक और नीरव मोदी का धोखाधड़ी मामला सामने आया है, तब से विभिन्न पक्षों के लोग सरकारी बैंकों के निजीकरण की मांग कर रहे हैं। पहले उद्योग संघ एसोचैम ने इसकी मांग की और इसके बाद फिक्की ने। इसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन और नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन ने भी इसमें सुर मिला दिया।
वेंकटचलम ने कहा कि वे यह भूल गए कि 1947 से 1969 (जब बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ) तक 736 निजी बैंक कुप्रबंधन के चलते बंद हो चुके थे। 1969 के बाद भी 36 निजी बैंक या तो असफल हो गए या उनका दूसरे बैंकों में विलय हो गया।
एक्सिस, आईसीआईसीआई में 9 लाख करोड़ जमा
उन्होंने कहा कि आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक दोनों के पास लोगों की नौ लाख करोड़ रुपये तक की राशि जमा है। इस धन को बचाने की जरूरत है। कई लोग निजी बैंकों में बेहतर गवर्नेंस की बात करते हैं। आईसीआईसीआई बैंक को रोल मॉडल के तौर पर पेश किया जा रहा था। अब देखिए उसमें क्या हुआ।
उन्होंने कहा कि इस बैंक में ऋण जारी करने में भ्रष्टाचार और मित्रवाद का गंभीर आरोप है। लंबे समय से अनैतिक काम चल रहे हैं। शीर्ष अधिकारियों को बदल देने भर से काम नहीं चलेगा। अब समय आ गया है कि सरकार आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक का राष्ट्रीयकरण कर दे।