500 और 1,000 रुपये के नोटबंदी के बाद नोट बदलने, पुराने नोटों को जमा करने तथा नकदी की निकासी के लिए उमड़ रही भीड़ को शांत करने के लिए बैंकों को जुगाड़ से भी काम चलाना पड़ रहा है। कहीं पुराने नोटों से काम चलाया जा रहा है तो कहीं सिक्कों की थैली ग्राहकों को थमायी जा रही है। ऐसा इसलिए, ताकि अधिक से अधिक ग्राहकों का काम चल सके। पंजाब नेशनल बैंक की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक उषा अनंतसुब्रमणियन ने अमर उजाला से बातचीत में स्वीकार किया कि बैंककर्मी ग्राहकों को शांत करने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं।
इन उपायों में ग्राहकों को सिक्कों की थैली सौंपना भी शामिल है। उनके मुताबिक छोटे शहरों, कस्बों या ग्रामीण इलाकों में अधिकतर ग्राहक 2,000 रुपये के नोट नहीं लेना चाहते। ऐसे ग्राहकों को 10, 20, 50 और 100 रुपये के नए और पुराने नोट देकर काम चलाया जा रहा है। कहीं-कहीं ग्राहकों को सिक्के ही दिए जा रहे हैं। बैंककर्मी पहले से ही प्लास्टिक की थैली में
सिक्कों को पैक करके रखते हैं ताकि ग्राहक जैसे ही मांग करें, उन्हें थैली थमा दी जाए।
एचडीएफसी बैंक के एक प्रबंधक ने बताया कि उनके यहां अधिकतर ग्राहक नए और छोटे नोटों की गड्डी मांग रहे हैं। सच्चाई यह है कि बैंकों में नए नोटों की गड्डी आ ही नहीं रही है। यहां नॉन इश्यूबल नोट भेजे जा रहे हैं, जिनमें मैले-कुचैले और कटे-फटे नोट शामिल हैं। ग्राहक जब ऐसे नोट लेने से इंकार करते हैं तो उन्हें समझाया जाता है कि अभी इसी से काम चला लीजिए। बाद में नए नोट आने पर उन्हें बदल दिया जाएगा।