दिसंबर 2015 में ऑडिट कंपनी डेलॉयट ने आलोक इंडस्ट्रीज के ऑडिटर पद से इस्तीफा दे दिया। यह एक अजीब फैसला था, क्योंकि ऐसा बहुत ही कम देखा गया है कि किसी वित्त वर्ष के बीच में किसी कंपनी का ऑडिटर बदले। हालांकि, कंपनी के मुताबिक इसकी जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दे दी गई थी।
इस तरफ बहुत ही कम लोगों की नजर पड़ी, क्योंकि तब तक कर्ज के बोझ तले दबी इस टेक्सटाइल कंपनी को अधिकतर एनालिस्ट्स ने ट्रैक करना भी बंद कर दिया था। आपको बता दें कि आलोक इंडस्ट्रीज ने अपनी सब्सिडियरी कंपनियों समेत भारत के बैंकों से करीब 20,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया हुआ है।
चार महीने बाद अब बैंक इसका ऑडिट कराने जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आलोक की तरफ से लिए गए इस लोन के पैसों का इस्तेमाल कहां किया गया है। पिछले हफ्ते ही बैंकों ने चोकशी एंड चोकशी और ग्रांट थॉर्नटन ऑडिट कंपनियों को आलोक का ऑडिट करने के लिए कहा था।
बैंकों का ज्वाइंट फोरम इसी हफ्तें इस मामले पर एक मीटिंग करेगा। फॉरेंसिक ऑडिट होने के बाद यह पता चल जाएगा कि पैसा कहां कहां लगाया गया है। साथ ही यह भी पता चलेगा कि इससे पहले ऑडिट में किसी तरह की गलती हुई है या नहीं।
बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एसबीआई की चार बड़ी फर्मों में से एक फर्म के साथ हुई मीटिंग के तुरंत बाद डेलॉयट ने इस्तीफा दे दिया। यह मीटिंग आलोक की तरफ से लिए गए लोन के इस्तेमाल के बारे में थी।
जब इस मीटिंग के बारे में डेलॉयट से पूछा गया तो उसने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया। डेलॉयट ने कहा कि हमारी पॉलिसी के अनुसार हम अपने क्लाइंट के कॉन्फिडेंशियल मामलों पर कोई भी टिप्पणी नहीं करते हैं। वहीं आलोक इंडस्ट्री के के एक्जिक्युटिव डायरेक्टर सुरेन्द्र जिवराजका के अनुसार डेलॉयट का इस्तीफा पूरी तरह से कमर्शियल कारणों के चलते दिया गया था।