केंद्र सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और वरिष्ठ अधिकारी राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखे जाएंगे। गुड़गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश में ज्यादा बैंकों की नहीं, बल्कि मजबूत बैंकों की आवश्यकता है।
गुड़गांव में शनिवार को आयोजित दूसरे ज्ञान संगम के अंतिम दिन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार बैंक को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखेगी। यही नहीं, जो वरिष्ठ अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं, उन्हें भी राजनीतिक दबाव से मुक्त रखा जाएगा।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों व अन्य बैंकों के फंसे कर्ज ‘एनपीए’के तेजी से बढ़ने के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप भी बताया जाता है। बैंकों के फंसे कर्ज को माफ करने की चर्चा पर उन्होंने कहा कि किसी भी बैंक के कर्जदार का पैसा माफ नहीं किया गया है और ऐसा करने की कोई योजना भी नहीं है। सभी कर्जदारों से वसूली होगी।
बैंक को भी इस बारे में काफी अधिकार है। उन्होंने बताया कि सरफेसी और डीआरटी कानून में संशोधन के कई सुझाव मिले हैं, जिन पर काम चल रहा है। इसके बाद बैंकों को फंसे कर्ज को वसूलने में सहायता मिलेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों की हालत ठीक करना उनकी प्राथमिकता में शामिल है और इसे किया जाएगा। उन्होंने मजबूत बैंक की तरफदारी करते हुए कहा कि कुछ कमजोर बैंकों को मिला कर मजबूत बैंक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसके लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। पिछले वर्ष जनवरी में आयोजित पहले ज्ञान संगम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद शामिल हुए थे और इस दौरान बैंकों में बदलाव को लेकर कई अहम फैसले किए गए थे। इस वर्ष के ज्ञान संगम का आयोजन गुड़गांव में हुआ।