बड़ी-बड़ी कंपनियों की तरफ से बैंकों से लिया गया लोन समय से न चुकाने के कारण करीब 55 हजार करोड़ रुपए की पूंजी 31 मार्च तक एनपीए में बदल सकती है। 74 ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो या तो एनपीए में तब्दील हो चुके हैं या फिर उनके प्रमोटर्स अपनी किस्तें देने में देरी कर रहे हैं, जिसके चलते वे एनपीए में तब्दील हो सकते हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, इन सभी परियोजनाओं में कुल मिलाकर करीब 3.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश संभावित है, जिसमें से बैंकों की तरफ से करीब 67 हजार करोड़ रुपए मंजूरी भी मिल चुकी है। आपको बता दें कि पब्लिक सेक्टर के बैंक पहले से ही रिकॉर्ड एनपीए का बोझ उठा रहे हैं।
इसमें कुछ ऐसे गैस आधारित पावर प्लांट शामिल नहीं हैं जो गैस के लिए स्थापित किए गए हैं। इन लोन के संदर्भ में बैंक अकाउंट्स को फिर से सामान्य स्थिति में लाने के लिए करीब दो सप्ताह के भीतर ही 5000 करोड़ रुपए बैंकों तक पहुंचना जरूरी है।