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आर्थिक सुधारों के साथ विकास दर बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता 

Wed, 03 Jul 2019 05:36 AM IST
Avdhesh Kumar बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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अरुण जेटली - फोटो : Facebook
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देश की आर्थिक विकास दर पांच साल में सबसे सुस्त रहने पर चिंता जताते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अर्थव्यवस्था की गति तेज करना हमारी पहली प्राथमिकता है। वित्त मंत्री ने मंगलवार को संसद में कहा कि सरकार बड़े आर्थिक सुधारों के साथ इसे दोबारा रफ्तार देने पर जोर देगी।
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सरकार की ओर से पिछले दिनों जारी आंकड़ों में 2018-19 की विकास दर 6.8 फीसदी के साथ पांच साल में सबसे कम रही थी। इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुस्ती के अलावा व्यापार, परिवहन, संचार और प्रसारण सेवा से जुड़े क्षेत्रों में छाई मंदी का असर विकास दर पर भी पड़ा है। 

कृषि क्षेत्र में 0.6 फीसदी गिरावट रही। सरकार ने कृषि क्षेत्र को गति देने के लिए सबसे बड़े सुधार के तौर पर किसानों के लिए 6 हजार रुपये सालाना की न्यूनतम आय योजना शुरू की है। इसके अलावा छोटे किसानों और दुकानदारों और खुदरा कारोबारियों के लिए भी पेंशन योजना शुरू की है। विकास दर से जुड़े मुद्दे सुलझाने को प्रधानमंत्री की अगुवाई में पांच सदस्यीय कैबिनेट समिति भी बनाई है। 
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एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा

वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र को बढ़ावा देने पर पूरा जोर है। इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नीतियों को भी सरल किया जा रहा है और कारोबारी सुगमता बढ़ाकर विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों के सरलीकरण से भी अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलेगी।

नोटबंदी का विकास पर असर नहीं

वित्त मंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि दो 2016 में की गई नोटबंदी का आर्थिक विकास पर कोई असर नहीं पड़ा है। विनिर्माण क्षेत्र की सुस्ती से रियल एस्टेट और उससे जुड़े क्षेत्रों पर असर हुआ है, लेकिन इसका कारण नोटबंदी नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में अमेरिका और चीन की विकास दर लगातार सुस्त होती गई है और हम अब भी सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने हुए हैं। 

बढ़ा है डिजिटल लेनदेन

सीतारमण ने दावा किया कि नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन में बड़ा उछाल आया है। यह नवंबर 2016 के 112.27 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर सितंबर 2018 में 188 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इस दौरान कुल 241.88 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन किए गए। इतना ही नहीं डिजिटल लेनदेन ने अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता लाने और कर राजस्व बढ़ाने में भी बड़ी भूमिका निभाई है। 
 
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