दरअसल, नए नियमों के आने के बाद दूरसंचार कंपनियों की सेवाओं की तर्ज पर ओटीटी कंपनियों को भी विभिन्न स्तरों पर नियमन करना होगा। ऐसे में वे अपनी सेवाओं के लिए शुल्क तय कर सकती हैं, जो फिलहाल निशुल्क हैं। ट्राई ने इससे पहले 2015 में इस मुद्दे पर एक परामर्श पत्र जारी किया था, लेकिन बाद में सिफारिशों को लागू नहीं किया गया था।
दूरसंचार कंपनियों को नुकसान
दूरसंचार कंपनियों की शिकायत है कि ओटीटी कंपनियों के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि इन कंपनियों के एप से देश-विदेश में होने वाली कॉल की तादाद लगातार बढ़ रही है। इसलिए दूरसंचार कंपनियों ने ट्राई से इन कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी। ऐसा करना दूरसंचार कंपनियों को नुकसान से बचाने और उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी है।
ट्राई के मुताबिक, ओटीटी कंपनियां रियल टाइम पर संदेश, कॉल और वीडियो कॉल मुहैया कराती हैं। इसके बावजूद उनकी कोई परिभाषा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरोपीय यूनियन ने इन कंपनियों की एक परिभाषा तय की है, जिसे कुछ देशों ने अपनाया है।
ट्राई का यह भी मानना है कि ओटीटी कंपनियां सेवा प्रदाता और उपभोक्ता मोबाइल ऑपरेटरों द्वारा नेटवर्क गुणवत्ता बेहतर करने पर किए गए भारी निवेश का भी लाभ उठाती हैं। हकीकत में दूरसंचार कंपनियों के ढांचे पर ही वे टिकी हुई हैं।