डिजिटल युग में हमारे इनबॉक्स और मोबाइल फोन ईमेल एवं टेक्स्ट मैसेज से लगातार भरे रहते हैं। इनके जरिये जहां एक ओर हमलोग एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं, दूसरी ओर साइबर ठग इनसे मिलते-जुलते भ्रामक (फिशिंग) ईमेल और मैसेज के जरिये हमारी व्यक्तिगत जानकारियां और लॉगइन विवरण चुरा लेते हैं। सावधानी नहीं बरतने पर साइबर ठग हमारे बैंक खातों में आसानी से सेंधमारी कर लेते हैं।
साइबर ठगी व बैंक धाखोधड़ी के ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आरबीआई की हाल ही में जारी सालाना रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक करती है। इसके मुताबिक, देश में पिछले एक साल में डिजिटल धोखाधड़ी 709 फीसदी बढ़ी है। ऐसे में अगर आप कुछ तरीके अपनाएं तो साइबर एवं बैंक धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकते हैं।
स्कैमर ऐसे बनाते हैं ठगी का शिकार
जरूरत की भावना पैदा करना: स्कैमर ऐसे ईमेल या मैसेज भेजते हैं, जो जरूरत की भावना पैदा करता है। मसलन, आपके बैंक खाते से छेड़छाड़ हुई है। भुगतान की समय-सीमा समाप्त हो गई है। ऐसे ईमेल या मैसेज आपको दबाव में लाने के लिए भेजे जाते हैं, ताकि आप बिना जांच-परख उनके निर्देशों का पालन करें।
डराना-धमकाना: अगर आप तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, तो स्कैमर्स ऐसे संदेशों के जरिये कानूनी कार्रवाई, खाता निलंबन या वित्तीय नुकसान की धमकी देते हैं।
भरोसे का फायदा उठाना: फिशिंग ईमेल आपके बैंक, क्रेडिट कार्ड कंपनी या ऑनलाइन सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से भेजे जाने वाले ईमेल की तरह दिखते हैं। स्कैमर बैंक खाते में संदिग्ध गतिविधियों और अविश्वसनीय ऑफर का झांसा देकर शिकार बनाते हैं।
इन तरीकों से बचाव संभव
टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन: कई ऑनलाइन सेवा कंपनियां टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन सुविधा प्रदान करती हैं। इसमें पासवर्ड के अलावा आपके फोन पर किसी प्रमाणिक एप से जेनरेट किया गया कोड भेजा जाता है।
मजबूत पासवर्ड बनाएं: सभी ऑनलाइन अकाउंट के लिए एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल न करें। अपरकेस-लोअरकेस अक्षरों, संख्याओं और प्रतीकों (सिंबल) के संयोजन से मजबूत पासवर्ड बनाएं।
सार्वजनिक वाईफाई के इस्तेमाल से बचें: इसके इस्तेमाल से स्कैमर बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड व संवेदनशील जानकारियों में सेंध लगा सकते हैं। अतिरिक्त सुरक्षा के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का उपयोग करें। अपने मोबाइल फोन या अन्य डिवाइस के सॉफ्टवेयर और अन्य एप्लिकेशन को अपडेट करते रहें।
ईमेल-मैसेज में आए लिंक पर सीधे क्लिक न करें: किसी भी लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से पहले हमेशा ईमेल या टेक्स्ट मैसेज की वैधता का आकलन करें। अगर कोई ईमेल आपके बैंक या किसी अन्य कंपनी से आता है, तो मैसेज के भीतर किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। इसके बजाय, सीधे कंपनी या बैंक की वेबसाइट पर जाकर अपने अकाउंट में लॉग इन करें। ईमेल या टेक्स्ट मैसेज पर संदेह होने पर इसकी जरूर शिकायत करें। -आदिल शेट्टी सीईओ, बैंक बाजार