तेलंगाना सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपये का जमीन घोटाला पकड़ा है, जिसके चलते गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा है। राज्य सरकार ने ऐसे लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है, जिन्होने फर्जी तरीके से इनकंपनियों को जमीन बेची थी। इसके अलावा राज्य सरकार ने इस तरह की सभी लैंड डील को कैंसिल कर दिया है।
गौरतलब है कि इस घोटाले को सबसे पहले विपक्ष ने उजागर किया था, जिसके बाद सरकार ने जांच बैठा दी थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार ने घोटाले से जुड़े सभी व्यक्तियों के खिलाफ कोर्ट में मामला चलाने की सहमति भी दे दी है।
जिन कंपनियों ने फर्जी तरीके से जमीन खरीदी थीं, उनमें गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के अलावा टिशमैन स्पैयर, शपूरजी पॉलनजी, डीएलएफ, लैंको, पूर्वांकारा और माई होम ग्रुप भी शामिल हैं। इससे इन्हें 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
हैदराबाद में ऐसे होती थी जमीन की खरीद-फरोख्त
निजी जमीनों के अलावा सरकारी जमीन का हैदराबाद में किसी तरह का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है। इससे घोटाला करने वाले लोग एक ही जमीन के टुकड़े को कई लोगों को बेच देते है। 2014 में तेलंगाना बनने के बाद हैदराबाद को इसकी राजधानी बनाने की घोषणा कर दी गई थी। कई लोगों ने इस बात का फायदा उठाते हुए कंपनियों को निजी और सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से नीलामी करके बेचा था। ऐसे लोगों ने जमीन का रजिस्ट्रेशन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से शहर के मियापुर और अन्य इलाके में मौजूद सैकड़ों जमीनों को कंपनियों को बेच डाला।
एक लोकल ब्रोकर के अनुसार, हैदराबाद का प्रॉपर्टी मार्केट लैंड रिकॉर्ड के मामलें में सबसे खराब है। शहर में कई ऐसी जमीन हैं जिनके एक से ज्यादा मालिक हैं। इसके चलते निवेशक यहां पर जमीन खरीदने से डरते हैं। ये हाल केवल प्राइवेट जमीन के साथ ही नहीं, बल्कि सरकारी जमीन के साथ भी है।