उपन्यास में जेंजी और हियान कोर्ट की एक महिला के बीच प्रेम की कहानी का भी उल्लेख है। हाल ही में मिले पांचवें अध्याय में प्रेमिका से पत्नी बनने के बाद मुरासाकी द्वारा धोखे से जेंजी की हत्या की कहानी भी सामने आई है।
रेइजेइक शिगुरुटी बुंको, जिन्होंने जापानी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण संस्थान की नींव रखी, उन्होंने माना कि उपलब्ध उपन्यास की प्रति का हिस्सा भी कवि फुजिवारा टीका ने ही लिखा है। उन्होंने कहा कि इस उपन्यास का अधिकांश हिस्सा दूसरी प्रतियों से मिलता है, लेकिन इनमें व्याकरण का अंतर जरूर है।
जुंको यामामोतो, जो कि क्योटो विश्वविद्यालय की प्रोफेसर हैं, उन्होंने बताया कि द टेल ऑफ जेंजी पर बहुत पहले से शोध होते रहे हैं। यह जेंजी के वजूद में होने के 250 साल बाद लिखी और संपादित की गई थी। उन्होंने आगे बताया कि टीका द्वारा दोबारा लिखी गई और संपादित की गई पांडुलिपी भी शोध के लिए उपलब्ध है।