क्या पढ़ाने जैसे काम के लिए किसी औरत को वर्जिन होना जरूरी होता है? कई लोग तो ऐसा मानते हैं कि शादीशुदा और बच्चे वाले टीचर्स बच्चों को ज्यादा बढ़िया समझते हैं।
लेकिन आपको हमारी ही तरह ये जानकर हैरानी होगी कि ब्राजील की सबसे भीड़-भाड़ वाली सिटी साउ पोलो में कई जगह टीचिंग जैसे प्रोफेशन के लिए उन औरतों की ही कड़ी डिमांड है जो वर्जिन हैं।
डेली मेल के मुताबिक बेहद बेतुकी सी लगने वाली ये कंडिशन कई औरतों को मुश्किलों में डाल रही है।
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साउ पोलो के ज्यादातर पब्लिक सेक्टर वर्करों को जब रेक्रूट किया जाता है, तो उन्हें एक लंबे वक्त के लिए रखा जाता है।
टीचिंग में ये टाइम पीरियड कम से कम 25 सालों का है। डिपार्टमेंट वालों की दलील है कि वो अपने वर्कफोर्स में उन्हीं लोगों को रखते हैं जो फिट होते हैं।
ऐसे में डिपार्टमेंट के मुताबिक वो मर्दों और पुरूषों की भर्ती से पहले कई तरह के टेस्ट करवाते हैं।
उनको दो ऑप्शन दिए जाते हैं। उन्हें या तो कई तरह के ऐसे टेस्ट करवाने को बोला जाता है जो उन्हें यौन रोगों से मुक्त दिखाए या फिर महिलाएं सीधे-सीधे खुद का वर्जिनिटी टेस्ट करवाएं और नौकरी लें।
होती है शर्मिंदगी
ऐसे प्रचलन का न सिर्फ साउ पोलो बल्कि पूरी दुनिया में विरोध किया जा रहा है।
टीचिंग जैसे प्रोफेशन को साउ पोलो में रहने वाली औरतें बेहद मुश्किल और शर्मनाक करार कर रही हैं।
उनके बाबत वर्जिन होना या ना होना एक औरत का अपना फैसला और नीजी बात है। इसे नौकरी का बेस बनाना सिरे से गलत है।
हटाए जाएं टेस्ट
वर्जिनिटी टेस्ट किसी भी औरत के प्राइवेसी में सीधा दखल है और संवैधानिक रूप से भी ये बिल्कुल ठीक नहीं है।
कई क्वाटर्स से जब इस रूल का सामूहिक बहिष्कार हुआ और ये बात सरकार के संज्ञान में आई तो वो बहुत आहत हुई।
साउ पोलो के बार एसोसिएशन ने इस प्रचलन को बीते जमाने में रहने जैसा बताया है। साथ ही साथ ऐसे टेस्ट की अब से छुट्टी करने की बात भी कही है।