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यहां ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले कहलाते हैं 'देशभक्त'

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जहां भारत अधिक आबादी की समस्या से जूझता है और लोगों को छोटा व सुखी परिवार रखने के लिए प्रेरित करता है वहीं कई ऐसे देश भी हैं जहां की जनसंख्या और जन्म दर इतनी कम है कि वे नागरिकों से बच्चे पैदा करने की अपील करते हैं। इसके लिए वे कई अजोबीगरीब तरीके भी अपनाते हैं।
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दक्षिण कोरिया सरकार ने 2010 में उन कर्मचारियों को ईनाम और इंसेन्टिव दिए थे जिनके एक से ज्यादा बच्चे थे। यही नहीं वहां दफ्तरों में हर बुधवार शाम 7 बजे बत्तियां बंद कर दी जाती हैं और इसे पारिवारिक दिन बताया जाता है।

ऐसा इसलिए ताकि कर्मचारी जल्दी घर जाकर बच्चे पैदा करने की कोशिश कर सकें और जिनके पहले से बच्चे हैं, वो उनका पालन पोषण कर सकें।

दक्षिण कोरिया में मां-बाप की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि वे अपने बच्चों का भरन-पोषण और शिक्षा का इंतजाम कैसे करें। इसलिए सरकार प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जाने वाले बाल सेवा केंद्रों में बच्चों की ट्यूशन फीस भरने को तैयार है। 
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बच्चे पैदा करो, कार और फ्रिज पाओ

रूस की जनसंख्या 1990 से लगातार कम हो रही थी। इसलिए 2007 में सरकार ने 12 सितंबर को गर्भधारण दिन घोषित कर दिया था। उस दिन कर्मचारियों को ऑफिस से छुट्टी मिलती थी ताकि वे उस दिन बच्चे पैदा करने की तरफ कदम बढ़ाएं।

ये इस मकसद से किया गया कि अगर वे सफल रहे तो रूस के राष्ट्रीय दिवस यानी 12 जून तक बच्चों की संख्या बढ़ जाएगी। ऑफर ये भी था कि जो महिलाएं 12 जून को बच्चे को जन्म देंगी, उन्हें फ्रिज, भारी रकम या कार ईनाम में मिलेगी। इसका असर भी हुआ और 2012 में रूस की जन्मदर अमेरिका के टक्कर की हो गई थी।

गर्भपात रोकने के लिए पुलिस रहती है तैनात

लगातार गिरती जन्मदर पर काबू पाने के लिए 1966 में रोमानिया की सरकार ने अनोखा नियम निकाला। जहां उन लोगों के लिए टैक्स में राहत और कई इंसेन्टिव हैं जो बच्चे पैदा करते हैं, वहीं उन लोगों के लिए सजा भी जिनके एक भी बच्चे नहीं होते।

25 साल से बड़े महिला-पुरुष को अपनी आय का 20 प्रतिशत टैक्स भरना होता है अगर उनके बच्चे नहीं है, भले ही वे शादीशुदा न हों।

जन्मदर गिरने के कारण कुछ सालों के लिए तो यहां तलाक लेने पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। 1967 में केवल 28 तलाक के मामलों को स्वीकार किया गया था। जबकि उससे एक साल पहले 26,000 तलाक हुए थे।

अस्पतालों में पुलिस तैनात की गई थी ताकि कोई अवैध गर्भपात न करा सके। सरकार ने गर्भ निरोध पर भी रोक लगा दी थी। इसका असर भी हुआ लेकिन सिर्फ तब तक जब तक पुलिस अस्पतालों में थी।

देशप्रेम दिखाएं बच्चे पैदा करके

सिंगापुर सरकार ने अपने यहां जन्म दर बढ़ाने के लिए मिंट टॉफी बनानी वाली कंपनी मेंटॉस के साथ मिलकर एक विज्ञापन कैंपेन चलाया। इसके जरिए उन्होंने लोगों से अपील की कि वे देश के प्रति अपना देशप्रेम दिखाए और बच्चे पैदा करें।

इस तरह देश की जन्म दर ऊपर जाएगी। ये विज्ञापन काफी वायरल भी हुआ। यह सरकार अपने नागरिकों को बच्चे पैदा करने के लिए उकसाती है और इस मिशन पर हर साल 88 अरब से भी ज्यादा पैसा खर्च करती है। वे हर बच्चे के लिए 1 लाख के करीब पैरेंटल पैकेज, टैक्स इंसेन्टिव और लंबी मैटर्निटी लीव भी देती है।
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रोबोटिक-बच्चे से प्रैक्टिस करते हैं मां-बाप

जापान में जन्म दर इतनी कम है कि अगर सुधारी नहीं गई तो 1000 साल में पूरे जापान के ही खत्म होने का खतरा है। इसके लिए 2010 में सुकूबा विश्वविद्यालय के छात्रों ने योतारो नाम का रोबोट बच्चा बनाया।

ये असली बच्चा भले ही न हो लेकिन ये रोता है, छींकता है, इसकी नाक बहती है और गुदगुदी करो तो हंसता भी है। योतारो को इसलिए बनाया गया ताकि इसे देख मां-बाप का दिल पिघले और वे खुद का बच्चा पैदा करने के बारे में सोचें।

दरअसल जापान को चिंता है कि उसकी आबादी तेजी से बुढ़ाती जा रही है और बच्चे कम पैदा हो रहे हैं। अगले तीस साल में जापान की आधी आबादी अधेड़ हो जाएगी।

जापान सरकार बाकायदा मिशन चलाकर लोगों को बच्चे पैदा करने के लिए उत्साहित कर रही है। पहले बच्चे पर 10 हजार डॉलर, दूसरे पर 30 हजार और तीसरे बच्चे के जन्म पर 40 हजार डॉलर की सरकारी मदद मिलने का प्रावधान होने के बाद जापान सरकार को उम्मीद है कि उसकी आबादी बढ़ेगी।
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