पुल का काम होता है दो ऐसे कोनों को जोड़ना जहां से लोगों का आना-जाना बहुत जरूरी होता।
एक बार अगर कोई पुल बन जाए, तो अक्सर ऐसा देखा जाता है कि फिर जल्दी या दोबारा उसे बनाने की नौबत नहीं पड़ती।
लेकिन जानिए एक ऐसे पुल के बारे में जिसे पिछले 500 सालों से हर साल बनाया जाता है। डेली मेल में छपी खबर के मुताबिक ये काम वो गांव वाले ही करते हैं जिनको इसकी जरूरत पड़ती है।
है एक रिवाज
पेरू में कुजको नाम की जगह पर अरपूरिमैक नदी के ऊपर क्वेशवाचा ब्रिज है। ये असल में एक ऐसी ब्रिज है जो रस्सी से बनी हुई है।
सालभर गांव के तकरीबन 2000 लोग इसी रस्सी वाले ब्रिज से दोनों तरफ-तरफ आना जाना करते हैं।
हैरत की बात ये है कि ये लोग चाहते हुए भी पुल को स्थाई चेहरा देने के लिए सरकार के ऊपर कभी आश्रित नहीं रहे।
है रिवाज
गांववालों का ये रिवाज है कि उन्हें हर साल इस 100 फीट के मोटे रस्सी के पुल को तैयार करना ही करना है।
तकरीबन 1000 लोग मिलकर इसे बनाते हैं और हर रोज 12 घंटे काम करने के बाद वो लोग इस पुल को फिर सिलते हैं।
पुराने पुल को तैयार में इन्हें 3 दिन का वक्त लगता है।
लगती है कड़ी मेहनत
गांववालों का मानना है कि इस पुल को बनाने में उन्हें मजा तो आता है लेकिन उसमें कड़ी मेहनत भी लगती है।
मोटी रस्सी को पुल का रूप देना बिल्कुल भी आसान काम नहीं होता। ये एक ऐसा रिवाज है जिसे माना जाता है कि इंका सभ्यता से चलाया जा रहा है।
हर साल पुल बन जाने के बाद पेरू के लोग एक बड़ी सी पार्टी करते हैं और पुल बना लेने का जश्न भी मनाते हैं।