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Women's Day: तिनका तिनका बंदिनी अवॉर्ड से सम्मानित की गईं 8 महिला कैदी

Wed, 08 Mar 2017 06:02 PM IST
amarujala.com- Presented by: संगीता तोमर
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला बंदियों को एक खास अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। तिनका तिनका बंदिनी अवॉर्ड के नाम से दिए जाने वाले ये अवॉर्ड उन महिलाओं का सम्मान है जो किसी ना किसी वजह से दूसरों के लिए प्रेरणा बनीं। इन अवॉर्ड्स में उन आठ महिलाओं को चुना गया है जो अलग अलग जुर्म में उम्र कैद की सजा काट रही है।
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2016 में शुरू किए गए इन पुरस्कारों का मकसद जेलों में सृजन और सकारात्मकता को बढ़ावा देना है।
 
छत्तीसगढ़ की बिलासपुर जेल में बंद कमल रेखा पांडे को इस साल तिनका तिनका बंदिनी अवॉर्ड का पहला पुरस्कार दिया गया। पिछले 12 साल से अपनी बहनों के साथ जेल में बंद कमल रेखा पांडे ने जेल में आकर कानूनी शिक्षा प्राप्त की और उस कानूनी ज्ञान के आधार पर जेल की 14 महिलाओं की रिहाई में बड़ी भूमिका निभाई।

इसी तरह गुजरात की वडोदरा जेल में आजीवन कारावास की सजा भुगत रही 26 साल की परवीनबानू नियाज हुसैन मालेक को जेल बंदियों को कंप्यूटर का ज्ञान देने और उन्हें खिलौने बनाना सिखाने के लिए दूसरा पुरस्कार दिया गया । पूरी जेल उन्हें मास्टर ट्रेनर मानती है।
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4 महिलाओं को जेल में महिला बंदियों और उनके बच्चों की देख-रेख करने के विशेष योगदान के लिए विशेष पुरस्कार दिया जा रहा है। पश्चिम बंगाल की बेहरामपुर केंद्रीय कारागार में 14 साल से बंदी 48 वर्षीय अनीता बनर्जी को जेल बंदियों की अभूतपूर्व सेवा के लिए चुना गया।

 

Women's Day: तिनका तिनका बंदिनी अवॉर्ड से सम्मानित की गईं ये 8 महिला कैदी

छत्तीसगढ़ की बिलासपुर जेल में आजीवन कारावास में बंद 33 वर्षीय वंदना जैकब एक सफल नर्स साबित हई है। वह अपनी मां के साथ जेल में आजीवन कारावास पर है। हिंदी और समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर चुकी वंदना सेना के एक डाक्टर की बेटी है औऱ जेल में रहते हुए पीएचडी भी कर रही है।
 
उत्तर प्रदेश के शहर फिरोजाबाद की जेल में बंद फामिदा जेल के 2 बेड के अस्पताल की पूरी जिम्मेदारी संभालती है। जेल प्रशासन के मुताबिक, जेल की महिलाओं और बच्चों के लिए उनकी सेवा बेहद प्रशंसनीय है।
 
32 साल की सरिता को भी जेल में एक कुशल नर्स की जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना गया है। लखनऊ, उप्र के नारी निकेतन में वह अपनी मां और दोस्त के साथ बंद है और अपनी युवा बेटी की याद में अब बंदियों की सेवा को ही अपना धर्म मानती है।
 
बिलासपुर की 34 वर्षीय शकीला ट्रासजेंडर है। जेल में उसने खिलौने बनाने सीखे। अब पूरी जेल को यह कला सिखाती है। इन खिलौनों की बिक्री की वजह से बंदियों को आर्थिक सहायता मिली है। उसने आजीवन कारावास को एक चुनौती के तौर पर स्वीकार किया है।
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तिनका तिनका बंदिनी अवॉर्ड से हुआ 8 महिला कैदियों का सम्मान

मध्य प्रदेश के शहर इंदौर की जिला जेल में बंद 28 साल की नेहा अब जेल में जरदोरी और ब्यूटीशियन का काम सिखाती है और अपने व्यवहार से बंदियों का मनोबल बढ़ाने में अक्सर सफल रहती है। आजीवन कारावास की सजा भुगत रही नेहा को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। उसे तिनका तिनका बंदिनी अवार्ड के विशेष वर्ग में सम्मानित किया जा रहा है।
 
तिनका तिनका के बारे में : तिनका तिनका जेल सुधार विशेषज्ञ वर्तिका नन्दा की जेलों पर अपनी तरह क पहली श्रृंखला है। भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी से स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित वर्तिका की किताब और गाना – तिनका तिनका तिहाड़ और तिनका तिनका डासना ने कई कीर्तिमान बनाए। उनकी किताब -तिनका तिनका तिहाड़, लिम्का बुक ऑफ रिकोर्डस में शामिल है।
 
कैदियों के लिए देश के पहले ख़ास सम्मान - तिनका तिनका इंडिया अवार्ड्स  और तिनका तिनका बंदिनी अवार्ड्स जेलों में सृजन और बदलाव लाने की बड़ी मुहिम का हिस्सा हैं। इन्हें वर्तिका नन्दा ने शुरू किया है। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कालेज में पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष हैं और अपराध बीट की देश की प्रमुख पत्रकारों में रही हैं।
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