New Year Interesting History: 1 जनवरी को नया साल मनाने का इतिहास काफी दिलचस्प है। इस दिन को लोग महज एक दिन की तरह नहीं, बल्कि त्योहार की तरह सेलिब्रेट करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस तारीख को हमेशा से साल की शुरुआत नहीं माना जाता था। सदियों पुरानी यह परंपरा राजनीति, रहस्यमय रोमन देवताओं और कैलेंडर सुधारों की कहानी है। प्राचीन रोमन कैलेंडर, जूलियस सीजर और ग्रेगोरियन कैलेंडर तक आते-आते यह तारीख साल की शुरुआत बन गई। आइए जानते हैं कब से शुरू हुई थी यह प्रथा।
रोमुलस कैलेंडर
पुराने रोम में सबसे शुरुआती कैलेंडर जिसे रोमुलस कैलेंडर कहा जाता था, सिर्फ 10 महीने के ही हुआ करते थे। जिसमें सर्दी के दिनों को गिना नहीं जाता था। इसमें जनवरी और फरवरी महीने शामिल न होने की वजह से कुल 304 दिन होते थे। इसी के साथ साल 1 मार्च को शुरू होता था जो वसंत खेती और युद्ध के मौसम से जुड़ा हुआ था। नागरिक कर्तव्य, त्योहार, सैन्य अभियान सभी इस मार्च आधारित कैलेंडर के मुताबिक ही आयोजित किए जाते थे। लगभग 700 ईसा पूर्व रोमन राजा नूमा पोम्पिलियस ने कैलेंडर में जनवरी और फरवरी को जोड़ा, क्योंकि यह खेती और युद्ध के लिए महत्वपूर्ण मौसम था।153 ईसा पूर्व में रोमन सीनेट ने आधिकारिक तौर पर राजनीतिक वर्ष की शुरुआत 1 जनवरी को कर दी ताकि नए चुने गए अधिकारी पहले पदभार संभाल सके और बाकी सैन्य अभियानों की तैयारी कर सकें।
जूलियन कैलेंडर
45 ईसा पूर्व में जूलियस सीजर ने जूलियन कैलेंडर पेश किया जो रोमन देवता जानूस के सम्मान में था। यह कैलेंडर सौर वर्ष के साथ मेल खाने लगा। इसलिए उन्होंने औपचारिक रूप से 1 जनवरी को साल का पहला दिन घोषित कर दिया। जिससे समय को मापने की यह पद्धति लोगों के जीवन को पहले से अधिक व्यवस्थित बनाने लगी। लेकिन जैसे ही रोमन साम्राज्य का पतन हुआ उसके बाद मध्ययुगीन ईसाई अधिकारियों ने 1 जनवरी को एक मूर्तिपूजक (मूर्तियों को ईश्वर का रूप मानकर उनकी आराधना करना) परंपरा मान लिया। यूरोप के कई क्षेत्रों ने इसके बजाए 25 दिसंबर या 25 मार्च को नया साल मनाना शुरू कर दिया।
ग्रेगोरियन कैलेंडर
1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने जूलियन प्रणाली में गलतियों को ठीक करने के लिए ग्रेगोरियन कैलेंडर पेश किया। जो सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की गति पर आधारित है और इसमें 365 दिन होते हैं। इस वजह से इसे सौर कैलेंडर भी कहा जाता है। इसमें हर चौथे साल लीप ईयर के रूप में 29 फरवरी जोड़ी जाती है, ताकि यह समय की ज़्यादा सटीक गणना कर सके। पोप ग्रेगरी XIII के इस सुधार ने 1 जनवरी को आधिकारिक नए साल के रूप में दोबारा से शुरू किया, तो वहीं कैथोलिक देशों ने इसे तुरंत अपना लिया, जबकि बाकी देशों ने बहुत बाद में इसे अपनाया।