रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी सुरक्षा को लेकर हमेशा खबरों में रहते हैं। उनके पास दुनिया की सबसे मजबूत सिक्योरिटी टीम है, लेकिन उनकी सुरक्षा व्यवस्था का एक ऐसा हिस्सा है जिसके बारे में जानकर लोग हैरान रह जाते हैं। दरअसल, पुतिन जहां भी जाते हैं, उनके बॉडीगार्ड्स एक खास ‘पूप सूटकेस’ साथ लेकर चलते हैं। इस सूटकेस का इस्तेमाल उनके मल यानी पॉटी को इकट्ठा करने और फिर सुरक्षित तरीके से रूस वापस ले जाने के लिए किया जाता है। तो आइए जानते हैं कि इसके पीछे का राज क्या है।
बॉडीगार्ड्स खास बैग्स में वेस्ट इकट्ठा करते हैं
यह जानकारी तब ज्यादा चर्चा में आई जब पुतिन अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अलास्का में मिलने पहुंचे थे। रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह अनोखा इंतजाम इसलिए किया जाता है ताकि किसी भी विदेशी ताकत को पुतिन की सेहत से जुड़ी गोपनीय जानकारी न मिल पाए। पत्रकार रेगी गेंटे और मिखाइल रुबिन ने दावा किया है कि रूस की फेडरल प्रोटेक्शन सर्विस इस काम को संभालती है। उनके मुताबिक पुतिन के बॉडीगार्ड्स खास बैग्स में उनका वेस्ट इकट्ठा करते हैं और उसे ब्रीफकेस में बंद कर रूस वापस ले जाते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, वियना दौरे के समय पुतिन ने पोर्टेबल टॉयलेट का इस्तेमाल किया था और उस दौरान भी उनकी पॉटी को रूस वापस भेजा गया था। बताया जाता है कि यह व्यवस्था कोई नई नहीं है, बल्कि 1999 से लागू है, जब पुतिन पहली बार सत्ता में आए थे।
क्यों किया जाता है ऐसा?
माना जाता है कि किसी इंसान की पॉटी से उसकी सेहत से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि वेस्ट सैंपल से पता लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति को कौन-सी बीमारी है, शरीर में हार्मोन का लेवल कैसा है या फिर कोई गंभीर रोग जैसे कैंसर या दिल संबंधी समस्या तो नहीं है। यही वजह है कि पुतिन की सिक्योरिटी टीम यह सुनिश्चित करती है कि उनके वेस्ट का कोई भी सैंपल विदेशी एजेंसियों तक न पहुंचे।
पुतिन की सेहत को लेकर चर्चाएं
पुतिन की सेहत पर लंबे समय से अटकलें लगाई जाती रही हैं। पिछले साल कजाकिस्तान में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्हें लगातार पैर हिलाते हुए देखा गया। इसके बाद लोगों ने कयास लगाए कि उन्हें पार्किंसन जैसी बीमारी हो सकती है। साल 2023 में जब पुतिन ने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से मुलाकात की, तब भी उनके शरीर में झटके देखे गए। इन घटनाओं ने उनकी सेहत को लेकर सवाल और बढ़ा दिए।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे दावे
कुछ रिपोर्ट्स में तो यहां तक दावा किया गया कि पुतिन को पहले दिल का दौरा पड़ चुका है और उस समय उनके आधिकारिक आवास पर ही उन्हें इमरजेंसी ट्रीटमेंट देना पड़ा था। हालांकि इन दावों की कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इससे यह साफ है कि उनकी सेहत को लेकर हमेशा चर्चा बनी रहती है। कुल मिलाकर पुतिन का ‘पूप सूटकेस प्रोटोकॉल’ सिर्फ एक सुरक्षा इंतजाम नहीं है, बल्कि उनकी मेडिकल प्राइवेसी को सुरक्षित रखने का तरीका भी है। दुनिया के दूसरे देशों में जाने के बाद भी वह कोई ऐसा सुराग पीछे नहीं छोड़ते, जिससे उनकी निजी सेहत की जानकारी किसी और को मिल सके।